खाबरी को टिकट से मायावती ने महसूस की थी अपने लिए शह, गठबंधन और कांग्रेस में खिचा जबर्दस्त पाला

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उरई। अब ये बात सामने आ गई है कि बसपा से निकाले गये नेताओं को टिकट देकर कांग्रेस ने बसपा प्रमुख मायावती को अघोषित शह दी थी। इसी के बाद मायावती बौखलाकर कांग्रेस पर लगातार हमलावर होती चली गईं।
कांग्रेस ने लोकसभा उम्मीदवारों की पहली सूची जब जारी की थी तो उसमें बसपा से लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य रहे बृजलाल खाबरी का नाम शामिल था। जालौन टाइम्स ने उसी समय यह खबर शाया कर दी थी कि कांग्रेस सपा-बसपा गठबंधन से उसे दूर रखे जाने के बाद रणनीति के तहत ऐसे उम्मीदवार सामने ला रही है जिससे मायावती को चुनौती महसूस हो।
अब यह बात सामने आ गई है कि जालौन टाइम्स का आंकलन एकदम सही था। पहली सूची में ही बृजलाल खाबरी का नाम शामिल करके कांग्रेस ने मायावती को अपने खिलाफ ऐसा उकसाया कि उनके बोल भाजपा से ज्यादा कांग्रेस के लिए तीखे होते गये। इसके बाद नसीमुददीन को टिकट देकर कांग्रेस ने आग में घी डालने का काम कर दिया।
कांग्रेस ने तो भीम आर्मी के चीफ चंद्रशेखर पर भी डोरे डाले थे हालांकि चंद्रशेखर ने कांग्रेस का दामन थामना कबूल नही किया। लेकिन कांग्रेस की इस कोशिश से मायावती और ज्यादा चिढ़ गईं। उन्होंने अपने गठबंधन पार्टनर अखिलेश यादव पर भी दबाव बनाया कि वे मंच से कांग्रेस को भाजपा के साथ एक ही तराजू पर तोलें। अखिलेश ने भले ही रुख थोड़ा नरम रखा हो लेकिन उन्हें बुआ जी की बात मानकर सभाओं में कांग्रेस की आलोचना भी करनी पड़ गई।
इस बीच कांग्रेस ने फतेहपुर में राकेश सचान को टिकट दे दिया। बांदा में बालकुमार पटेल को उम्मीदवार बना दिया। सपा ने इसे कांग्रेस की अपनी पार्टी में तोड़फोड़ की कार्रवाई माना जो कि लाजिमी था।
चौथे चरण के बाद गठबंधन और कांग्रेस की खाई ने उत्तर प्रदेश में बड़ा रूप ले लिया है। बाराबंकी में जहां राहुल गांधी ने भी कह दिया कि सपा और बसपा दोनों का कंट्रोल भाजपा के पास है वही अखिलेश ने भी इसका तीखा जबाव दिया है। इसी बीच प्रियंका वाड्रा की यह सफाई सामने आई कि कांग्रेस ने जहां उसकी स्थिति कमजोर है वहां ऐसे उम्मीदवार उतारे हैं जो भाजपा के वोट काट सकें। इसे नकारते हुए कांग्रेस के उम्मीदवारों को लेकर मायावती की टीस खुलकर सामने आ गई है। मायावती ने कहा कि कांग्रेस ने गठबंधन को नुकसान पहुंचाने वाले उम्मीदवार मैदान में उतारे है तांकि भाजपा की मदद हो सके। जालौन टाइम्स का आंकलन इससे सटीक साबित हो गया और अंदाजा लग गया है कि कांग्रेस की पहली सूची में खाबरी के नाम को मायावती ने कितनी गंभीरता से लिया था इसीलिए उरई की सभा में उन्होंने अपने भाषण की शुरूआत भाजपा की बजाय कांग्रेस को निशाने पर लेकर की थी।