मुआवजा न मिलने से खफा फोरलेन प्रभावितों ने शुरू किया आंदोलन,खानकाह मस्जिद के पास धरने पर बैठे

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कालपी-उरई । मुआवजा न मिलने से खफा फोरलेन प्रभावितों का आंदोलन शुरू हो गया है। मंगलवार को प्रभावितों तथा उनके परिवार के सदस्यों ने अनशन स्थल पर बैठकर अपनी मांग के लिए आवाज बुलंद की लेकिन इस बार धरने की जानकारी के बावजूद नगर में मौजूद अपर जिलाधिकारी भी फोरलेन प्रभावितों से मिले बगैर ही वापस हो गए जिससे कयास लगाए जा रहे हैं कि यह लड़ाई लंबी खिंच सकती है।

एक दशक के बाद नगर सीमा में अधूरी पड़ी फोरलेन परियोजना की शुरूआत हुई थी जिससे लगने लगा था कि अब कुछ ही दिनों में नगर की बदहाल यातायात व्यवस्था दुरुस्त हो जाएगी लेकिन एेसा सोचना गलत साबित हो रहा है और आलम यह है कि पांच माह के कार्य के दौरान अभी तक सर्विस रोड का भी निर्माण पूरा नहीं हो सका है। हालांकि इसके लिए जनता के साथ प्रशासन तथा हाईवे अथारिटी भी कम दोषी नहीं है जिन्होंने इस समस्या को कभी भी गंभीरता से नहीं लिया है और इसका खामियाजा नगर की जनता के साथ यहां से गुजरने वाली जनता को भोगना पड़ता है। हालांकि निर्माण कार्य की रफ्तार को देखकर लोग उम्मीद जताई जा रही थी कि बरसात के पहले सर्विस रोड का कार्य पूरा हो जाएगा  लेकिन अब यह उम्मीद भी टूटने लगी है। उधर मुआवजा न मिलने से खफा फोरलेन प्रभावितों ने निर्माण कार्य ठप कराकर आंदोलन की राह पकड़ ली है। हालांकि आंदोलन की राह पकडऩे से पहले उन्होंने प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर मांगें पूरी करने का भी आग्रह किया था लेकिन प्रशासन ने उनके द्वारा तय समय में ऐसा कुछ भी नहीं किया जिससे उन्हें मुआवजा मिलने की उम्मीद दिखती। विदित हो कि गत माह भी प्रभावितों ने मुआवजे की मांग को लेकर काम बंद करा दिया था और धरने पर बैठ गए थे। हालांकि सात दिन बाद अपर जिलाधिकारी प्रमिल सिंह के आश्वासन के बाद वह मान गए थे लेकिन निर्धारित अवधि निकल जाने के बाद भी प्रशासन तथा प्राधिकरण अपना वादा पूरा नहीं कर पाए जिससे प्रभावित फिर से खफा हो गए और उन्होंने मंगलवार से फिर से आंदोलन की राह अख्तियार कर ली। आलम यह है कि वह खानकाह मस्जिद के पास टैंट लगाकर धरने पर बैठ गए हैं जबकि वह निर्माण कार्य इससे पहले ही ठप करवा चुके हैं। प्रभावितों का नेतृत्व कर रहे इस्लाम अंसारी की मानें तो यह धरना मुआवजा न मिलने तक जारी रहेगा फिर इसके लिए उन्हें कुछ भी कीमत क्यों न चुकानी पडे़। विदित हो कि रविवार को प्रभावितों द्वारा प्रशासन को सौंपे गए ज्ञापन में आमरण अनशन का भी जिक्र है अगर एेसा होता है तो यह प्रशासन की सबसे बड़ी नाकामी होगा। इस मौके पर एनुल हसन मंसूरी, नरेंद्र भास्कर, मुहम्मद अहमद मंसूरी के अलावा फोरलेन प्रभावित तथा उनके परिवार के सदस्य मौजूद रहे।