किसान सम्मान निधि योजना या किसान अपमान योजना

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माधौगढ़-उरई। प्रधानमंत्री की किसान सम्मान निधि योजना उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के नाकारापन की वजह से किसान अपमान योजना के रूप में व्यवहारिक तौर पर चरितार्थ हो रही है। माधौगढ़ तहसील के एक लेखपाल ने तो योजना को लेकर डीएम से राज्य सरकार तक पर छींटाकशी की जुर्रत कर डाली।
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के फार्म जमा करने के लिए किसान दर-दर भटक रहे हैं। अधिकारियों और कर्मचारियों की करतूत के बारे में फीडबैक लेने की राज्य सरकार की अनिच्छा का भरपूर फायदा वे उठा रहे हैं। जिससे प्रदेश में भ्रष्टाचार और मनमानी का नंगा खेल खेला जा रहा है। किसान सम्मान निधि योजना भी इस नंगनाच की भेंट चढ़ चुकी है।
माधौगढ़ तहसील की अमखेड़ा ग्राम पंचायत के लेखपाल से जब गांव के किसान आवेदन जमा करने के लिए मिले तो उसने कहा कि उसे आवेदन जमा करने का कोई अधिकार नहीं है। जब किसानों ने इसका प्रतिवाद किया तो उसने खींझकर कहा कि पता नहीं किस बेवकूफ ने यह योजना बनाई है। योजना की नियमावली क्या है यह मुझे तो छोड़िये डीएम तक को नहीं मालूम। इस पर किसान छोटे मुंह बड़ी बात करने को लेकर उससे बिगड़ गये तो वह शांत हो गया।
किसानों को राजकीय कृषि बीज भंडार में फार्म जमा करने की भी सलाह दी जा रही है जबकि गुरूवार को बीज भंडार बंद था और उसके प्रभारी का अता पता नहीं था। किसानों को खतौनी निकलवाने में भी परेशानी हो रही है। तहसील में खतौनी निकालने वाले स्टाफ ने गुरूवार को किसानों को यह कहकर टरका दिया कि वह जनरेटर ठीक करा रहा है। खतौनी नहीं निकाल पायेगा।
गौरतलब है कि एक दिन पहले ही कोंच तहसील के एक लेखपाल को किसान सम्मान निधि का फार्म पैसे लेकर जमा करने का वीडियों वायरल हो जाने की वजह से निलंबित किया गया था। फिर भी लेखपालों के हौसले बुलंद हैं। किसानों को जलील करके पैसा वसूलने की नीयत के चलते ही उन्हें पैण्डुलम की तरह इधर से उधर झुलाया जा रहा है।

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