तिल की बुवाई न हो पाने से माधौगढ़ तहसील के किसान बेहाल

IMG-20210112-WA0003

माधौगढ़-उरई। जिले में अभी तक न के बराबर बारिश हुई है। अवर्षण के कारण किसान बुवाई के लिए जमीन तक तैयार नहीं कर पाये हैं जबकि इसका सीजन समाप्त होने के चंद दिन शेष रह गये हैं। कुदरत की इस मार की वजह से जिले के सबसे उपजाऊ गढ़ में किसानों की आमदनी दुगनी करने के सरकार के प्रयास औधे मुंह नजर आ रहे हैं।
खरीफ खरीफ में माधौगढ़ तहसील में तिल, मूंग, ज्वार, बाजरा और उर्द की बुवाई मुख्य रूप से होती है। किसान का पूरा बजट तिल की फसल संभालती है क्योंकि इसमें कोई लागत नहीं है और बुवाई के पहले एक दो बार की बारिश ही इसके लिए पर्याप्त हो जाती है जबकि बाजार में तिल की कीमत किसानों को भरपूर मिलती है। लेकिन इस बार हालात इतने खराब है कि तिल की भी बुवाई अभी क्षेत्रभर में कहीं नहीं हो पायी है। किसानों को इसके कारण भारी आर्थिक संकट की आहट सुनाई देने लगी है। नतीजतन एक बार फिर 2005 जैसे बड़े पैमाने पर पलायन के आसार इलाके में फिर पनपने लगे हैं।
उधर बकायेदार केसीसी धारकों से वसूली के लिए सरकार ने उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयां फिर तेज कर दी हैं। कई केसीसी धारक किसानों को जमीन नीलामी के नोटिस मिल चुके हैं। पिछले महीने तक उन्हें उम्मीद बंधी थी कि जून खत्म होते-होते एक दो ढ़ंग का पानी गिर जायेगा जिससे तिल बोकर वे कर्ज वापसी की तैयारी कर सकेंगे। ऐसे किसानों के लिए तिल की बुवाई न कर पाने से कलेजा मुंह में आने की नौबत आ गई है।
हालांकि उपनिदेशक कृषि अनिल कुमार तिवारी का विश्वास है कि 10 जुलाई तक तिल की बुवाई लायक एक दो झमाझम बारिश जरूर हो जायेगी जिससे किसानों को पर्याप्त दिलासा मिल सकेगा।