बच्चो अगर पढना है तो पहले स्कूल में झाड़ू लगानी पड़ेगी

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* सुलखना के परिषदीय स्कूल में बच्चों से लगवाई जा रही है झाड़ू

* समय से नहीं पहुंच रहे हैं गुरुजन, दस बजे स्कूल में मौजूद नहीं था कोई

* आज संपूर्ण समाधान दिवस में डीएम से ग्रामीण करेंगे शिकायत

कोंच। नदीगांव विकास खंड के ग्राम सुलखना स्थित प्राथमिक विद्यालय में बच्चों से झाड़ू लगवाने का मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप है। इसका वीडियो भी वायरल हो रहा है। बीएसए राजेश शाही का कहना है कि मीडिया के माध्यम से ही उनके संज्ञान में आया है, पूरे मामले की जांच करा कर कार्यवाही की जाएगी। इस स्कूल की स्थिति यह है कि टीचर कभी भी पढाने नहीं आते हैं और न ही शिक्षा मित्र, सिर्फ एक अनुदेशक के सहारे स्कूल को चलाने का प्रयास किया जा रहा है। शिक्षकों के नहीं आने से अभिभावक अपने बच्चों का दाखिला भी स्कूल में नहीं करा पा रहे हैं जिससे उनमें आक्रोश है।

एक तरफ तो जुलाई का महीना आते ही स्कूलों में स्कूल चलो अभियान चला कर अधिकाधिक बच्चों को नामांकित कराने के लिए कवायद शुरू हो जाती है और पूरा शिक्षा विभाग सारे काम धाम छोड़ कर केवल स्कूल चलो अभियान पर फोकस करने लगता है लेकिन दूसरी तरफ योगी सरकार में बच्चों को स्कूलों में झाड़ू लगानी पड़ रही है। यह स्थिति शिक्षा व्यवस्था की पोल खोलने के लिए काफी है। विकास खंड नदीगांव के सुलखना परिषदीय प्राथमिक विद्यालय का भी यही हाल है, यहां स्कूल आते ही बच्चे सबसे पहले हाथों में झाड़ू थामते हैं और पूरे स्कूल को चकाचक करने के बाद ही उनकी कक्षाएं शुरू होती हैं, लेकिन वहां पढाने बाला कोई नहीं होता है क्योंकि शिक्षक और शिक्षा मित्र स्कूल ही नहीं आते हैं। यह स्कूल केवल एक प्रेरक देवसिंह वर्मा के सहारे चल रहा है। इस स्थिति को लेकर ग्रामीण न केवल परेशान हैं बल्कि गुस्से में भी हैं और 16 जुलाई मंगलवार को कोंच तहसील में आयोजित होने बाले संपूर्ण समाधान दिवस में इस पूरे मामले की शिकायत करने का मन बना रहे हैं। कहने को तो स्कूल में प्रधानाध्यापक अजय सिंह, इंचार्ज प्रधानाध्यापक महेन्द्रप्रताप यादव तथा शिक्षा मित्र नीरजकुमार गुप्ता की तैनाती इस स्कूल में है लेकिन सुबह दस बजे जब संवाददाता स्कूल पहुंचा तो वहां ग्रामीणों की भीड़ तो भी जो अपने बच्चों का दाखिला कराने के लिए वहां पहुंचे थे लेकिन शिक्षक या शिक्षा मित्र में से कोई भी वहां नहीं मौजूद था। इतना ही नहीं, कक्षा तीन की एक छात्रा हाथों में झाड़ू थामे स्कूल के कमरों की सफाई करती दिखी।

 

One thought on “बच्चो अगर पढना है तो पहले स्कूल में झाड़ू लगानी पड़ेगी”

  1. पूर्व में भी जालौन के स्कूलों की दशा का व्याख्यान हो चुका है पर जिम्मेदार मौन रहते है

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