नहरों और रजवहों में फुलगेज से पानी न आने से किसान पलेवा को परेशान

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जालौन। नहरों और रजवहों में फुलगेज से पानी न आने से किसान पलेवा के लिए परेशान हो रहे हैं। किसानों को काफी दाम खर्च ट्यूबबैल से पानी लेकर पलेवा करने को मजबूर होना पड़ा रहा है। किसानों ने डीएम से फुलगेज में नहरों एवं रजवहों में पानी चलाने की मांग की है।
किसानों के लिए इस समय पलेवा का समय चल रहा है लेकिन नहरों व रजवहों में कम गेज से पानी आने के चलते किसान अपने खेतों में पलेवा नहीं कर पा रहे हैं। जैसे जैसे पलेवा का समय बीतता जा रहा है किसानों के चेहरों पर चिंता की लकीरें खिंचती चली जा रही हैं। जालौन क्षेत्र में अधिकांशतया हरी मटर बोई जाती है जिसकी बुआई के लिए अक्टूबर माह ही सही समय माना जाता है लेकिन अक्टूबर माह बीतने के साथ ही नवंबर माह आने को है। इस समय तक पलेवा होने के साथ ही बुआई भी चालू हो जानी थी लेकिन खेत सूखे होने की वजह से किसानों बुआई के लिए लेट होते जा रहे हैं। जैसे जैसे समय बीत रहा है किसानों के चेहरों पर चिंता की लकीरें गहरी होती जा रही हैं। उन्हें चिंता सता रही है कि यदि समय से बुआई न हो सकी तो पूरे साल उनका घर खर्च कैसे चलेगा। परेशान किसानों को ट्यूबबैल के पानी का सहारा लेना पड़ रहा है। छोटे किसान बड़े किसानों को रुपए देकर अधिक दामों पर ट्यूबबैल से पानी लेकर खेतों में पलेवा कर रहे हैं। जिन किसानों के पास रुपए नहीं है उन्हें नहर व रजवहे के पानी का ही सहारा है। गढग़ुवां माइनर में पानी न आने से गढग़ुवां, बिरहरा, कुठौंदा बुजुर्ग, काशीपुरा, गधेला आदि गांव के आसपास के खेतों में पलेवा नहीं हो पा रहा है। किसान गजेंद्र सिंह सेंगर, कृष्णमोहन सिंह, नरेंद्र सिंह, देवेंद्र सिंह, ज्ञानचंद्र आदि ने डीएम डा. मन्नान अख्तर से मांग करते हुए कहा कि नहरों एवं माइनरों में फुलगेज से पानी छोड़ा जाए ताकि पानी टेल तक पहुंच सके और दूरदराज के गांव के लोगों को पलेवा के लिए पानी मिल सके। यदि समय से पलेवा व बुआई न हो सकी तो किसानों की कमर टूट जाएगी।