*ज्योतिष शास्त्र की दृष्टि में*कोरोना * जून तक रहेगा प्रभावी

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*आज पूरी दुनिया में कोरोना वायरस* के कारण हाहाकार मचा हुआ है. इस विश्व ब्यापी महामारी ने मानव जाति को विक्षिप्त सा कर दिया है. सब स्तब्ध है क्या करे क्या न करे. पृथ्वी पर जब जब ग्रहण पड़ते है और एक ही स्थान में पाँच या इससे अधिक ग्रह होते है तथा शनि साथ मे हो तो ग्रहण में विषाणु पैदा करते है.
 २६ दिसंबर २०१९ को जब सूर्य गृहण पड़ा तो उस समय ६ ग्रह इकठ्ठे थे. इनका विषैला प्रभाव हमारी पृथ्वी पर अवश्य पड़ा और जब १५ दिन में दो ग्रहण पड़ जाए तो प्रकृति डांवाडोल होती है. भूकंप भी आते है. इसका प्रत्यक्ष प्रमाण देखा गया है. पशु पक्षी भी संक्रमण का शिकार होते है.
……. तो प्रथम सूर्यग्रहण दिनांक २६-१२-२०१९ को तथा माघ चंद्रग्रहण १० जनवरी २०२० को पड़ गया(अर्थात १५ दिनों में दो बार).
कब तक रहेगा कोरोना का संत्रास 
यह कोरोना महामारी कब तक पैर पसारेगी कब यह दुनिया से जाएगी।भारत के लिए समय ग्रहों के अनुसार कैसा होगा इस पर ज्योतिष  द्रष्टव्य डालना भी आवश्यक है.
भारत की राशि धनु इसका स्वामी गुरु है जो २९ मार्च २०२० को नीच राशि मकर में शनि मंगल के साथ आएगे. गुरु के मकर राशि आने पर क्या परिणाम होंगे उदधृत है:
*मकरे च गुरौ दुभिक्षम घोर दारुणं।*
*विग्रहं यान्ति राजानः त्रिमासांते शुभं भवेत।।*
*गुरु शनि एक राशि मे चलते बक्राचार।*
*कष्ट प्रजा अति पावती मचती हाहाकार।।*
अर्थात मकर राशि मे गुरु आने से दुर्भिक्ष और घोर दारुण दुःख आते है.. सरकारों में विग्रह होता है और तीन महीने बाद शांति आती है.
 इसके अलावा गुरु, शनि,मंगल एक ही राशि मे होने से तथा बक्री होने से प्रजा यानी आम जनता में कोई बड़ा संकट या क्षय आता है और हाहाकार मचता है.
 ऐसे में बीमारी आदि से कष्ट आते है तो मंगल साथ मे है जो ४ मई २०२० तक रहेगा अर्थात २९मार्च २०२० से ४मई २०२० तक का समय ठीक नही है. ऊपर लिखा प्रभाव पड़ेगा . इसके अलावा यह समस्या २१ जून २०२० तक रहेगी.
जब दिनांक २१ जून२०२० रविवार को सूर्यग्रहण पड़ेगा तब  इस आपदा से छुटकारा मिलेगा. महामारी से बचने के लिए सरकार ने बचाव के जो निर्देशन दिए हैं उनका पालन और समर्थन मिलकर हम सबको करना चाहिए जिसमें एकांतवास
ही सर्वोत्तम उपाय है।
भीड़ भाड़ से बचे
स्वच्छ रहे,स्वस्थ रहे
२९मार्च से ४ मई तक सावधानी की बड़ी आवश्यकता है बचाव का समय जून २०२० तक रहेगा
*२१ जून २०२० को दोपहर १२बजे इतना अंधेरा छायेगा कि दिन में तारे नजर आएंगे*
आने बाला सूर्यग्रहण २१ जून २०२० को प्रातः १० बजकर २० मिनट पर आरम्भ होगा. यह ग्रहण दिल्ली में ९४% रहेगा! इसे नंगी आंखों से देखने पर रोशनी जा सकती है. आप देखने के लिए बैल्डिंग बाला चश्मा प्रयोग  कर सकते है. इसका प्रभाव एवम परिणाम खतरनाक होगा. इसके अंधकार में विषाणु पैदा होंगे जो दिखाई नही देंगे और मानव जाति एवं पशु पक्षियो को प्रभावित करेगे किंतु इस ग्रहण के समय मे कोरोना महामारी का वायरस भी खत्म हो जाएगा
ऐसा पहले ही लिखा है. इस ग्रहण काल में एक विचित्र घटना भी होगी जो अभी तक किसी ने नही देखी होगी यह कि सूर्यग्रहण में १२ बजे दिन में जब अंधकार हो जाएगा तो एक काली पट्टी सी तेज दौड़ती हुई दिखाई देगी. यह भारत के शहर चमोली ,देहरादून,जोशीमठ ,सूरतगढ, सिरसा आदि में साफ दिखाई देगी
.यहां पर वैज्ञानिक एवम शोधकर्ता छात्र इकट्ठे होकर भविष्य के लिए नए शोध इतिहास रचेंगे।
यह ग्रहण मेष,सिंह,कन्या मकर ,मीन राशि को शुभ होगा जबकि वृष तुला,धनु राशि बालो को मध्यम और मिथुन,कुंभ  कर्क ,बृश्चिक को अशुभ होगा. गर्भवती महिलाओं  को बाहर नही निकलना चाहिए तथा अपने साड़ी और दुप्पट्टे के पल्लू में मेवाफल बांधे  अंदर रहना चाहिए. बाद में वे फल सफाई कर्मचारी को दान करे तथा चक्कू इत्यादि से सब्जी, फल इस समय मे न काटे।
घर मे रखे हुए दूध दही आदि में तुलसीदल डाले या कुशा डाले क्योंकि ग्रहण काल मे न दिखने बाले विषाणु वायरस पनपते है और तेजी से फैलते है. इसीलिए तो ग्रहण काल मे ग्रहण से पहले स्नान का  प्रावधान है. प्रारम्भ में हवन बहुत ही शुभ होता है तथा बाद में दान आदि और मध्यसाम्य में श्री राम,हरि स्मरण भजन और कीर्तन के रूप में करे।
इस ग्रहण का व्यापक प्रभाव पड़ेगा.  जन मानस को ऋषि परंपरा का निर्वाहन करने से कोई भी अशुभ प्रभाव से पूर्ण रक्षण मिलेगा.
ग्रहणों के अनुसार आने वाला वर्ष वर्षा की दृष्टि से उत्तम होगा।किसानों में खुशहाली आएगी तथा फसलों की पैदावार अच्छी होगी।
 आप लोग इस ग्रहण काल मे यदि वैदिक नियमो  का पालन करेंगे तो आपके लिए अत्यंत अनुकूल होगा।
ग्रहणकाल को मनुष्य माने या न माने किंतु प्रत्यक्ष देखे कि ग्रहण के समय भय उत्त्पन्न होता है. पक्षी कुछ घंटे पहले अपना आलाप बंद कर देते है. बंदर पेड़ो से उतरकर नीचे आ जाते है और चुप हो जाते है |
 ग्रहणकाल में समूचे सौरमंडल में विकार उत्पन्न होता है. इसके प्रभाव से जड़ चेतन सभी प्रभावित होते है.
*सन २०३० का समय दुनिया को अत्यंत भीषण होगा*
ऐसा ही एक विकराल भयंकर महामारी का समय सन २०३० में आएगा जब १५ दिन के अंदर (पंचग्रही) योग के साथ दो ग्रहण पड़ेगें. दोनो ग्रहण राहु, शनि के संयोग में रहेगे और पांच ग्रह एक ही स्थान पर होंगे.  १ जून २०३० शनिवार प्रातः १०:२० से दोपहर १२:४० तक सूर्यग्रहण होगा और ठीक १५ वे दिन यानी १५ जून २०३० शुक्रवार को रात्रि १०:५१ बजे से १:२० बजे रात तक चंद्र ग्रहण होगा. यह दोनों पंचग्रही ग्रहण पूरी दुनिया के लिए घातक सिद्ध होंगे.
इसी समय मे २९.१०.२०३० से रोहिणी में शनि बक्री होगा और दिसंबर तक कृतिका में प्रवेश करेगा. तब समय खराब माना जाता है अर्थात २०३० का समय दुर्भिक्ष (अकाल), महामारी और अन्य प्रकोपों ,मानव निर्मित कारणों से यह धरा ब्याकुल होगी और चौतरफा हाहाकार मचेगा.
*यही ज्योतिषशास्त्र का प्रबल अनुमान और संधान है*
*ईश्वर इच्छा  सर्वोपरि है*
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भविष्यवक्ता – पं.संजीव थापक ज्योतिषाचार्य ब्योना हाउस जालौन रोड उरई (उ.प्र.)
09415153399, 0995642551

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