लंका विजय कर अयोध्या लौटे प्रभु राम मिले भरत और अयोध्यावासियों से ,रंगमंच के अलावा महंतनगर में काली मंदिर पर भी हुआ भरत मिलाप

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कोंच। अवसान की ओर अग्रसर कोंच की ऐतिहासिक रामलीला के 168वें महोत्सव में मंगलवार की रात्रि भरत मिलाप लीला का मंचन किया गया। पहले रामलीला रंगमंच पर लीला के रूप में इसका मंचन कोविड नियमों के तहत बिना दर्शकों के किया गया। इसके पश्चात परंपरागत रूप से महंतनगर में काली मंदिर पर भरत मिलाप कराया गया।
मंगलवार की रात रामलीला रंगमंच पर भगवान गजानन की आरती के बाद भरत मिलाप लीला का संक्षिप्त में मंचन किया गया। 168 बर्ष पुरानी परंपरागत और अनुष्ठानी कोंच की रामलीला का प्रारंभिक इतिहास बताता है कि स्टेजबद्ध होने से पूर्व अपने प्रादुर्भाव काल में रामलीला कोंच के आसपास अवस्थित बाग-बगीचों और मंदिरों में संपन्न होती थी। लगभग साढे छह दशक पूर्व बीच बाजार में रामलीला का भव्य और विशाल भवन अस्तित्व में आने के बाद रामलीला का मंचन स्टेज पर होने लगा लेकिन अभी भी उन प्रादुर्भाव कालीन परंपराओं का निर्वहन किया जाता है जिसके चलते जिन बाग-बगीचों और मंदिरों में जो लीलाएं होती रही हैं उन जगहों पर आज भी भगवान के सजीव श्रीविग्रह जाकर परंपराओं का निर्वाध निर्वहन करते आ रहे हैं। भरत मिलाप की परंपरा के निर्वहन में मंगलवार को देर रात महंतनगर में भी भरत मिलाप कराया गया। इस दौरान रमेश तिवारी, अभिषेक रिछारिया, सुधीर सोनी, हरिश्चंद्र तिवारी, सुशील दूरवार, मारुतिनंदन लाक्षकार सहित रामलीला से जुड़े तमाम लोग मौजूद रहे। पांचों मूर्तियों की आरती पवन अग्रवाल ने उतारी।

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