आखिर जो बाइडन के राष्ट्रपति बनने का रास्ता साफ

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निवर्तमान होने जा रहे डोनाल्ड ट्रम्प अमेरिका के ऐसे राष्ट्रपति रहे हैं जिन्होंने पद पर रहते हुए भी दुनिया के सबसे शक्तिशाली लोकतंत्र वाले अपने देश की फजीहत कराई और कार्यकाल के आखिरी चरण में भी उन्होंने इसमें कोई कसर नहीं छोड़ी। वे अभी भी अपनी हार मानने को तैयार नहीं है जबकि उनके प्रतिद्वंदी डेमोक्रेट प्रत्याशी जो बाइडन की जीत पर अब लगभग पूरी तरह मोहर लग चुकी है। वे कुछ भी कहते रहे अंततोगत्वा यह तय है कि 20 जनवरी 2021 को जो बाइडन अमेरिका के 46 वे राष्ट्रपति के बतौर पदभार ग्रहण कर लेंगे।
गत 03 नवम्बर को हुए अमेरिकी राष्ट्रपति के चुनाव में वर्ष 1900 के बाद सबसे अधिक मत पड़े। बाइडन ने 07 करोड़ से अधिक मत जीते जो कि एक रिकार्ड है। किसी भी राष्ट्रपति को इतने मत नहीं मिले थे। बाइडन को राष्ट्रपति पद तक पहुंचने के मैजिक नम्बर 272 इलेक्टोरल कालेज वोटों की जरूरत थी जबकि पूरी परिणाम घोषित होने के पहले ही बाइडन 290 इलेक्टोरल कालेज वोट हासिल कर चुके थे। अपनी जीत तय होने के बाद बाइडन ने कहा कि वे सभी अमेरिकियों के राष्ट्रपति होंगे चाहे उसने मुझे वोट दिया हो या नहीं।
कौन है जो बाइडन-
78 वर्ष के जो बाइडन अभी तक के सबसे उम्र दराज राष्ट्रपति होंगे जबकि 1972 में जब वे डेवावेयर से पहली बार सीनेटर चुने गये थे तो अमेरिकी इतिहास के सबसे कम उम्र में चुने जाने वाले छठे सीनेटर थे। बाइडन बराक ओबामा के साथ 47 वे उपराष्ट्रपति चुने गये थे। खास बात यह है कि उन्हें ओबामा से भी अधिक पापुलर वोट मिले थे। ओबामा प्रशासन में वे दो बार उपराष्ट्रपति रहे थे उनका पूरा नाम जोसेफ राॅबिनेट बाइडन जूनियर है। उनका जन्म पेनसल्वेनिया राज्य के स्टेटन में हुआ था। लेकिन वे बचपन में ही डेलवेयर चले गये थे। निवर्तमान होने जा रहे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प 1990 के बाद फिर एक ही कार्यकाल तक पद पर रह पाने वाले राष्ट्रपति के रूप में इतिहास में दर्ज होंगे। इसके बावजूद ट्रम्प ने न तो अभी तक अपनी हार मानी है और न ही बाइडन को बधाई दी है। वे अभी शेखचिल्लियों की तरह कह रहे हैं कि आखिर में दुनिया देखेेगी कि वे किस तरह जीते।
सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया शुरू-
हालांकि जनरल सर्विसेस एडमिनिस्ट्रेशन की मुखिया एमिल मर्फी को उन्होंने यह निर्देशित करके कि वे सत्ता सौंपने के शुरूआती प्रोटोकाल का पालन करें। यह जाहिर कर दिया है कि वे भी वास्तविकता से अनभिज्ञ नहीं हैं। इसके बाद एमिल मर्फी ने जो बाइडन को उन्हें जीत की मान्यता देने की चिट्ठी लिखी है। हालांकि मर्फी ने स्पष्टीकरण यह दिया है कि उन पर व्हाइट हाउस या किसी और ने पदभार हस्तांतरित करने की प्रक्रिया में देरी के लिए दबाव नहीं डाला था। उन्होंने कहा कि बाइडन को मान्यता देने का फैसला उन्होंने उपलब्ध तथ्यों और कानून के मुताबिक स्वतंत्र रूप से लिया है। जनरल सर्विसेस एडमिनिस्ट्रेशन (जीएसएस) की मान्यता के बाद बाइडन के पास संघीय कोष और अपना आधिकारिक कार्यलय होगा। इसके साथ ही उपराष्ट्रपति कमला हैरिस को राष्ट्रीय सुरक्षा की खुपिया जानकारियां तुरंत देना शुरू कर दी जायेगी। अमेरिका में पद हस्तांतरण की प्रक्रिया को ट्रांजिशन कहते हैं। बाइडन-कमला हैरिस को सत्ता हस्तांतरण दल के कार्यकारी निदेशक पोटानेस अब्राहम सहायता कर रहे हैं ताकि नये राष्ट्रपति को पद भार संभालने के बाद अचानक जटिल स्थिति आ जाने पर फैसला लेने में कोई मुश्किल न हो।
बाइडन ने शुरू किया टीम का चयन-
इस बीच जो बाइडन ने सरकार का गठन शुरू कर दिया है। इसके तहत उन्होंने अपने पुराने सहयोगी एन्थनी ब्लिंकन को विदेश मंत्री और जैक सुल्लिवान को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार नियुक्त किया है। पहली बार जलवायु दूत को राष्ट्रीय सुरक्षा समिति में शामिल किया गया है। जाॅन कैरी का चयन जलवायु के विशेष दूत के रूप में किया गया है। जो बाइडन ने क्यूबा में जन्में एलेजांड्रो मायोरकस को गृह मंत्री बनाया है। थाॅमस ग्रीन फील्ड को संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत और अरविल हैंस को राष्ट्रीय खुफिया निदेशक की जिम्मेदारी देने का फैसला किया है।
ट्रंप की हठधर्मिता बरकरार-
ट्रंप कह रहे हैं कि वे पहले से भी अधिक मत हासिल होने पर हार कैसे सकते हैं लेकिन यह भी बताना नहीं भूलते कि अश्वेतों की वजह से वे पीछे रह गये। कुल मिलाकर यह जान लेने के बाद भी कि उन्हें पद छोड़ना पड़ेगा उनकी हठधर्मिता बरकरार है। उनका कहना है कि जब तक सभी राज्यों के चुनाव निकाय बाइडन की जीत की पुष्टि नहीं करेंगे तब तक वे उन्हें राष्ट्रपति नहीं मानेंगे। वे बाइडन पर बड़े पैमाने पर वोटों में धांधली का आरोप लगा रहे हैं और कह रहे हैं कि उनके पास अपने इस दावे को साबित करने के लिए पर्याप्त सुबूत हैं। लेकिन अमेरिका की अदालतें उनके द्वारा ऐसे कोई सबूत पेश न कर पाने की वजह से उनके मुकद्दमें खारिज कर रहीं हैं। उधर उन्होंने अपने पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार माइकल फ्लिंक को कार्यभार छोड़ने के पहले माफी देने का संकेत दिया है जिन्हें 2017 में एफबीआई के सामने अमेरिकी चुनाव में रूसी हस्तक्षेप की जांच में झूठे बयान देने का दोषी पाया गया था।

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