महिलाओं की प्रमुखता के युग में शांति, समृद्धि को मिली मजबूती

20191128_121956
IMG-20200820-WA0008
IMG-20200831-WA0002
IMG-20200831-WA0003
IMG-20210112-WA0003

उरई। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर परमार्थ समाज सेवी संस्थान के तत्वावधान में सोमवार को इन्दिरा पैलेस में सशक्त नारी सम्मेलन का आयोजन किया गया। महिलाओं को बराबरी का अधिकार सुनिश्चित किये बिना किसी सभ्य समाज की कल्पना नहीं की जा सकती है। महिलाओं के लिए अब जब सभी क्षेत्रों में प्रवेश के द्वार खोल दिये गये हैं तो उनकी बहुमुखी प्रतिभा सामने आ रही है। जिससे समाज व्यापक रूप से लाभान्वित हो रहा है। यह बात कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अपर जिलाधिकारी प्रमिल कुमार सिंह ने अपने संबोधन में कही। उन्होंने कहा कि बुन्देलखण्ड की महिलायें बहुत काम करती हैं जिसका जीता जागता प्रमाण यहां के स्वयं सहायता समूह की महिलायें हैं। जिसके माध्यम वह स्वयं आत्मनिर्भर बनकर अपना एवं जिले का नाम रोशन कर रही हैं।
कार्यक्रम का शुभारम्भ मुख्य अतिथि कें द्वारा दीप प्रज्जवलन के साथ हुआ। सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहीं शशि सोमेन्द्र सिह ने कहा कि सभ्यता के शुरूआत के दौर में समाज का नेतृत्व महिलाओं के हाथ में था। जिसकी झलक आज भी जनजाति समाजों में देखने को मिलती है। महिलाओं की मुखियायी वाले समाज में शांति, समृद्धि और न्याय के मूल्यों का बोलवाला देखने को मिलता था। जिनका क्षरण तथाकथित प्रगति के दौर में महिलाओं को दोयम दर्जे में धकेले जाने के कारण तेजी से हुआ। इसलिए आज महिलाओं को समाज में फिर से प्रमुखता दिये जाने की आवश्यकता है।
परमार्थ के निदेशक अनिल सिंह ने महिलाओं ने संघर्ष करके राजनैतिक, आर्थिक और सामाजिक क्षेत्र में पहचान बनाई है जो राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इनकी कहानियों की चर्चायें हो रही हैं। उन्होंने महिला दिवस के इतिहास के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि इसका इतिहास 108 वर्ष पुराना है और इसकी पहली झलक उस समय देखने को मिली थी जब रूस में हजारों महिलायें अपने अधिकारों के लिए सड़क पर उतर आयी थी। सन 1975 में संयुक्त राष्ट्र ने इस दिन को मान्यता दी और तब से लेकर आज तक हर वर्ष लगातार हर देश व देश के कोने में महिला दिवस का आयोजन किया जाता है।
महिला थानाध्यक्ष नीलेश कुमारी ने कहा कि महिलायें पुरूषों से किसी भी क्षेत्र में कम नहीं हैं उनके अंदर अपार क्षमतायें होती हैं सिर्फ उन क्षमताओं को अवसरों की प्रतीक्षा होती है। कई बार अवसर मिलते है तो कई अवसर लेने पड़ते हैं लेकिन जब भी अवसर मिलते हैं महिलायें अपने आप को साबित करके दिखाती हैं। महिलाओं को उनकी क्षमताओ के बल पर सम्मान प्राप्त होता है।
परमार्थ के कोषाध्यक्ष भूपेन्द्र गुप्ता ने कहा कि नारी और पुरूष समाज के दो पहिये हैं। जिन्हें बराबरी से संचालित किया जाना चाहिए अन्यथा समाज की प्रगति असंतुलन का शिकार होकर गर्क हो जाती है।रक्त कणिका ममता स्वर्णकार, डा0 कल्पना श्रीवास्तव, समाज सेवी कुसुमलता सक्सेना, परिवीक्षा अधिकारी संध्या झा, संरक्षण अधिकारी जूली खातून, ने भी विचार प्रकट किये। कार्यक्रम का संचालन सतीश चन्द्र एवं आभार प्रदर्शन वरूण सिंह ने किया।

इसके पहले टाउन हाल मैदान से महिलाओं की जनजागरण रैली जोशीले नारों के साथ निकाली गई। जिसे खंड विकास अधिकारी जालौन महिमा विद्यार्थी एवं सीडीपीओ महेबा उर्मिला कुशवाहा ने संयुक्त रूप से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह रैली शहीद भगत सिंह चैराहा, अम्बेडकर चैराहा व जिला परिषद होते हुए इन्द्रिरा पैलेस पर समाप्त हुई इसके बाद गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस दौरान सिप्रा आजाद एवं उनकी टीम द्वारा महिला सशक्तिकरण से संबंधित जीशीले गानों को प्रस्तुत किया गया।
इस अवसर पर विभिन्न क्षेत्रो में उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाओ को सम्मानित किया गया और उनसे प्रेरणा लेने की अपील की गई। कमलेश रगौली, सुशीला किशुनपुरा, पूनम मढ़ेपुरा, किरन देवी टीहर, सीमा धमना आदि को सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर परमार्थ संस्थान के शिवमंगल सिंह, संदीप पाण्डेय, आरती कुशवाहा, प्रभा सिंह, प्रवीणा यादव, रीतेश कुमार, राधिका शर्मा, कशिश वर्मा, स्वाती, दिनेश कुमार, निर्मल पाल, शिवम कुमार, उपेन्द्र यादव, हर्षित, रागिनी दीक्षित, बृजेश शुक्ला, संतोष कुमार सहित विकास खंड रामपुरा, माधौगढ़, नदीगांव, डकोर एवं उरई शहर की तीन सैकड़ा से अधिक महलाओं ने सहभागिता की।

0 0 vote
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Inline Feedbacks
View all comments