महिलाएं आ अनुशासन के साथ अपने काम में संपूर्णता लाएं,एक- दूसरे को कमजोर कर समाज मजबूत नहीं हो सकता

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उरई। भारतीय जन नाट्य संघ और मुस्कान इंस्टीट्यूट के संयुक्त तत्ववाधान में आयोजित गोष्ठी में महिला समाज और भारतीय समाज की बेहतरी के लिए कई महत्वपूर्ण बातें सामने आईं। इस दौरान कहा गया कि पुरूष समाज को सिर्फ दोषी ठहराकर महिलाएं विकास नहीं कर सकती। उसे अपनी ताकत और भूमिका को भी समझना होगा।
गोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में आमंत्रित सनातन महिला महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. अमिता सिंह ने दोनों पक्षों की समीक्षा करते हुए कहा कि एक – दूसरे के सहयोग के बिना स्त्री या पुरुष में से कोई मजबूत नहीं हो सकता। कहा कि यह दोष देना गलत है कि प्राचीन काल में महिलाएं शिक्षित नहीं थीं। यदि ऐसा होता तो कालिदास के  समय में इतनी विद्वत महिला विद्योत्मा नहीं होती। हम सीखते नहीं । हम अनुशासन में नहीं रहना चाहते। परिवार के लिए संस्कार और संस्कार के लिए धैर्य की जरूरत होती है। कोई भी काम किया उसमें संपूर्णता लाने की कोशिश हो। उन्होंने कहा कि चाहे पुरुष हो या स्त्री – दोनों एक दूसरे पर दोषारोपण कर समाज को मजबूत आधार नहीं दे सकते। एक महिला की ओर से  कोशिश तो यह भी होनी चाहिए कि एसी किसी गली में कोई भूखा वृद्ध पड़ा हो तो उसे रोटी बनाकर खिलाये। क्या इस कर्तव्य के बारे में किसी ने सोचा ?
समाज सेविका में शिक्षक सारिका तिवारी आनंद ने कहा कि यदि महिलाओं को सशक्त होना है तो उन्हें किसी दूसरे पर निर्भर होने की आशा छोड़नी होगी। महिला वर्ग अपनी प्राथमिकताओं को खुद नहीं समझ पा रहा है। कांग्रेस नेत्री शकुंतला पटेल ने माना कि किसी भी महिला पर अन्याय सबसे पहले उसके घर से आरम्भ होता है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं प्रभा शुक्ला ने कहा कि अपनी जिम्मेदारियों को समझते हुए आगे बढ़ना चाहिए। सामंजस्य के साथ अधिकारों का उपयोग किसी परिवार को ताकत देता है। गोष्ठी का संचालन डॉ. स्वाति राज ने किया। इस अवसर पर इंस्टीट्यूट की छात्राओं की ओर से अन्याय शोषण और भेदभाव को लेकर कई तर्कपूर्ण भरी बातें रखी गईं। कई छात्राओं का उद्बोधन बहुत ही सामायिक और धारापूर्ण रहा। अपना पक्ष रखने में शिवा, उपमा,अलीमा,प्रांजलि, सीरीन, गौरी,दीक्षा, प्रतीक्षा, अंजली और गोल्डी सफल रहीं। राज पप्पन ने कहा कि न्याय , सच्चाई की बातें जब तक महिला समाज अपने भीतर उतारकर समाज की सच्चाई को नहीं परखेगा, तब तक इस प्रकार के महज दिवस ही मनाए जाते रहेंगे।
इसके पूर्व सरस्वती पूजन और दीप प्रज्ज्वलन हुआ। सरस्वती वंदना शिवांगी, गोल्डी और अंशिका ने प्रस्तुत की। इप्टा गीत राज पप्पन,देवेंद्र शुक्ला, सुभाष चंद्र और संतोष दीक्षित ने प्रस्तुत किया। इनका एक गीत अंत में भी हुआ। इस अवसर पर इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर डा. अंकुर शुक्ला, डॉ . रेहान सिद्दीकी, सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।
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