दो शहरी समेत आठ गांवों में होगी फाइलेरिया की नाइट सर्वे

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हर गांव से पांच पांच सौ लोगों के लिए जाएंगे ब्लड सैंपल

 

उरई । फाइलेरिया रोगियों की खोजबीन के लिए जनपद में दो नगरीय क्षेत्र समेत आठ गांवों को चिह्नित किया गया है।  रोजाना आठ बजे से ग्यारह बजे तक नाइट सर्वे कर चिह्नित लोगों के ब्लड सैंपल लेकर उनकी फाइलेरिया संबंधी जांच की जाएगी। इसके लिए माइक्रो प्लान बनाकर टीमों का गठन कर दिया गया है।अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी (वेक्टर बोर्न) डॉ वीरेंद्र सिंह ने बताया कि फाइलेरिया जिसे  आम भाषा में हाथी पांव भी कहा जाता है यह रोग क्यूलैस मच्छर काटने से फैलता है। संक्रमित मच्छर काटने के  बाद व्यक्ति में छह महीने बाद फाइलेरिया के लक्षण आते है। पहले उसे हल्का बुखार आता है। इसके बाद प्रभावित अंग में लालिमा शुरू हो जाती है। अगर समय से इलाज न किया जाए तो यह रोग गंभीर हो जाता है। हालांकि यह जानलेवा नहीं है लेकिन पीड़ित व्यक्ति को पूरे जीवन भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

उन्होंने बताया कि जिले में फाइलेरिया के नाइट सर्वे के लिए डकोर में औता, माधौगढ़ ब्लाक के सरावन, कदौरा ब्लाक के अकबरपुर इटौरा, कोंच ब्लाक के पिंडारी,रामपुरा ब्लाक के टीहर, कुठौंद ब्लाक के कुठौंद को चिह्नित किया गयाहै। जबकि नगरीय क्षेत्र में उरई शहर के मोहल्ला नया पटेलनगर, कोंच के मोहल्ला मालवीयनगर को चिह्नित किया गया है। उन्होंने बताया कि 7 अप्रैल से नौ अप्रैल तक चलने वाले इस अभियान में पूरे जनपद में कुल चार हजार लोगों के सैंपल लिए जाने हैं। जिला मलेरिया अधिकारी डॉ जीएस स्वर्णकार ने बताया कि माइक्रोप्लान बना लिया गया है। शहरी क्षेत्र की टीम में  स्वास्थ्य कार्यकर्ता, लैब टैक्नीशियन, फाइलेरिया इंस्पेक्टर और फील्ड वर्कर रहेंगे  जबकि ग्रामीण क्षेत्र की टीम मे्ं स्वास्थ्य कार्यकर्ता, लैब टैक्नीशियना, एएनएम व आशा कार्यकर्ता रहेंगी। प्रत्येक टीम को पांच सौ लोगों के सैंपल लेकर उनकी जांच करानी है। एक टीम रोजाना करीब 175 लोगों के  सैंपल एकत्रित करेगी। इसके लिए संबंधित आशा गांव में लोगों को सूचित करेगी। फाइलेरिया इंस्पेक्टर सुरेश नागर ने बताया कि पिछले साल 507 रोगी चिह्नित किए गए थे जिनका  इलाज चल रहा है। उन्होंने बताया कि रोगी मिलने पर पहले उसे 12 दिन की दवा दी जाती है। नाइट सर्वे का एसीएमओ वेक्टर बोर्न, डीएमओ द्वारा निरीक्षण भी किया जाएगा। उन्होंने बताया कि फाइलेरिया  संबंधी लक्षण ब्लड में रात के समय ही दिखाई देते है। इसलिए नाइट सर्वे किया जाता है।

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