जगम्मनपुर में दारू मुर्गा पर भारी पड़ रहा शांतेलाल का विजन

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dir="auto">देश के कर्णधारों ने कभी सत्ता के विकेंद्रीकरण का स्वप्न देखा था और ग्राम स्तर तक सरकार को पहुचाने के लिए ग्रामपंचायत की व्यवस्था की थी।
संविधान सभा की बहस में गाँधीवादी गाँव को राष्ट्र की इकाई बनाना चाहते थे। इसके उलट डाँ अम्बेडकर ने व्यक्ति व नागरिकों को राष्ट्र की इकाई बनाया। ग्राम पंचायत को नीतिनिदेशक तत्वों में शामिल करके भविष्य की संसदीय राजनीति के लिए छोड़ दिया गया। राजीव गाँधी सरकार ने संविधान संशोधन द्वारा राजनीति का विकेंद्रीकरण करते हुए नगर पालिका और ग्राम पंचायत चुनावों को संवैधानिक बना दिया। इसके बाद खासकर गाँवों की राजनीति मुखर हुई और सामाजिक व्यवस्था में भी कुछ परिवर्तन हुए। निश्चित तौर पर मताधिकार और सत्ता की भागीदारी का विस्तार हुआ।
लेकिन आज इसके ढेरों नकारात्मक नतीजे भी सामने आ रहे है। लोकतंत्र का सबसे विकृत रूप गाँव की राजनीति व सत्ता संचालन में दिखाई पड़ता है। वोटर्स को लुभाने के लिए नीतियों एवम् कार्य संचालन की बात नहीं होती है। बल्कि शराब व पैसों से वोट खरीदने की परम्परा आम हो चली है।
वोटर्स के पैरो पर गिरकर वोट मांगते हुए उम्मीदवारों को देखकर ऐसा लगता है कि जैसे लोकतंत्र ने इस भ्रष्ट व्यवस्था के आगे घुटने टेक दिए हो।
देश के गाँवो के चहुंमुखी विकास के लिए कर्णधारों ने पंचायती राज की व्यवस्था कायम करने के लिए संविधान में संशोधन किया था आज उत्तर प्रदेश में  उसी ग्राम पंचायत चुनाव का जश्न चल रहा है |हर व्यक्ति उसमे भागीदारी को तत्पर है |हर मोड़ , गली नुक्कड़ , गाँव की बाजारों में चुनावों की ही चर्चा है | चर्चा होना सहज है और आवश्यक भी है | किन्तु चर्चा जाति गत आकड़ों की न होकर विकास की योजनाओं की होनी चाहिए | भारत के गावों में आज भी गरीबी, अशिक्षा,बिमारी कुपोषण की तरह फैली हुई है | बीते वर्षों में विकास हुआ है किन्तु उसकी गति संतोष जनक नहीं रही है | सरकारों की योजनाओं ने नीति निर्धारकों और उनका सञ्चालन करने वालों की तिजोरियां तो भरी लेकिन योजना का लाभ उपयुक्त व्यक्ति तक नहीं पहुचा |
आज पंचायत चुनाव को कमाई का बहुत ही बड़ा साधन बना दिया गया है | नेत्रत्वकर्ता चुनाव जीतने पर मिलने वाली शक्ति का उपयोग ग्राम विकास के लिए नहीं बल्कि स्वयं के विकास के लिए करता है | चूँकि अभी भी ग्रामीण भारत बहुत पीछे है इसलिए ग्राम स्तर पर आज भी अच्छे और समाज के हित के लिए काम करने वालों के लिए बहुत से अवसर हैं |जरूरत है इक्षाशक्ति की , अच्छी और विकासवाद की सोच की जो की जातिवाद के बंधन से मुक्त हो।
एक ऐसे ही प्रत्याशी उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से 208 किलोमीटर दूर जिला जालौन की जगम्मनपुर ग्राम पंचायत सीट से प्रधान पद प्रत्याशी पूर्व अध्यापक शान्तेलाल का विजन चर्चा का केंद्र बना हुआ है।
एक तरफ जहाँ ग्राम पंचायत चुनावों में प्रत्याशी भ्रष्टाचार के दलदल में नख से शिख तक धसे है वहीं शान्तेलाल अपने ग्राम समाज को बदलने के लिए जी जान से जुटे है। शायद ही किसी ने सुना होगा कि ग्राम पंचायत प्रत्याशी शराब पैसे की जगह एक विजन से साथ लोगो की स्थिति को बदलने के लिए जी जान से जुटा है। शान्तेलाल का विजन भी ऐसा जो जमीन पर उतर जाए तो गाँव का कायाकल्प कर दे। तेजी से बदलते हुए समाज में जीवन को जीने के लिए ‘रोटी कपड़ा और मकान’ के अलावा मूलभूत आवश्यकताएं ग्रामीण जीवन के सामने है। शिक्षा एवम् स्वास्थ का प्रभाव परिवार की आर्थिक परिस्थितियों पर भी पड़ता है। शान्तेलाल के विजन के पचास बिंदुओं में पहले कुछ बिंदु ही स्वास्थ एवम् शिक्षा को लेकर है। इसके अलावा बेरोजगारी की मार झेल रहे नौजवानों को लेकर भी गाँधीवादी शान्तेलाल जी प्रतिबद्ध है। उनके विजन के प्रथम पाँच बिंदु स्वास्थ एवम् शिक्षा को लेकर है। शान्तेलाल के विजन के प्रथम पाँच बाद बिंदु – सेल्फ हेल्प एंबुलेंस सेवा, समुन्नत लाइब्रेरी की व्यवस्था, पुलिस-फौज की भर्ती के इच्छुक नौजवानों को फ्री शारीरिक व्यायाम और कोचिंग की व्यवस्था, प्राइमरी में पढ़ने वाले बच्चों को फ्री कोचिंग, जेएनयू, डीयू, बीएचयू जैसे नामी विश्वविद्यालयों और नवोदय, आदि विद्यालयों के प्रवेश  परीक्षा की गाँव में तैयारी की व्यवस्था करना है।
पूर्व अध्यापक शान्तेलाल पर्यावरण को लेकर भी सजग है। बुंदेलखंड पानी की समस्या से हमेशा जूझता रहा है। शान्तेलाल ने इस समस्या को हल करने का भी सुझाव अपने विजन में दिया है। बकौल शान्तेलाल गाँव में पर्यावरण अनुकूल सड़कों का निर्माण ताकि जलस्तर बना रहे, बरसात में गाँव के पानी को तालाबों मे रोकर जलस्तर को ऊँचा उठाने का प्रयास करना, एक तालाब का उच्च स्तरीकरण करके तरणताल में तब्दील करना उनके प्रमुख कामो में शामिल रहेगा।
लगभग पचास बिंदुओं के साथ शान्तेलाल समाज
को बदलने के लिए चुनावी मैदान में है। आसपास की कई पंचायतों में उनके विजन कि चर्चा जोर पकड़ने लगी है। लोगो को भ्रष्टाचार के विषैले धुएं के बीच एक ऐसा रोशनदान नजर आने लगा है जिससे उजाले  कि किरण आ रही है।
लोगो को अब शराब व विकास में से किसी एक को चुनना है। जगम्मनपुर ग्राम पंचायत के लोगो को शिक्षा व बेरोजगारी में से किसी एक को चुनना है।
जगम्मनपुर ग्राम पंचायत की महिलाओं को शराबियो को संरक्षण व शराब देकर घरेलू हिंसा बढ़ा रहे लोगो तथा एक शिक्षित एवम् कर्मठ व्यक्ति में से किसी एक को चुनना है। नौजवानों को पुस्तकालय, शिक्षा तथा बेरोजगारी में से किसी एक को चुनना है।
द्वारिका नाथ पांडेय
6387425744