कोविड के ख़िलाफ़ जागरूकता के लिए मीडिया जन कमर कसेंगे

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झांसी । कोविड-19 और उससे संबंधित मुद्दों पर यूनिसेफ और न्यू कांसेप्ट सेंटर फॉर डेवलेपमेंट कम्यूनिकेशन द्वारा झांसी मंडल के पत्रकारों के एक बड़े वर्ग का अभिमुखीकरण सोमवार को सोशल मीडिया पर किया गया, जिसमें जनपद तीनों जनपद के वरिष्ठ पत्रकारों ने प्रतिभाग किया।  इस संवाद का संचालन वरिष्ठ पत्रकार अश्विनी भटनागर और वरिष्ठ संचार विशेषज्ञ डॉ. संजीव कुमार के द्वारा किया गया।

अभिमुखीकरण में बोलते हुए वरिष्ठ पत्रकार अश्विनी भटनागर ने कहा कि कोविड के दूसरे दौर के आने से पत्रकारों की कोविड संबंधी सूचना के प्रचार-प्रसार में भूमिका फिर से बढ़ गयी है। पिछले कुछ महीनो में कोविड प्रकोप में आयी कमी की वजह से बचाव के उपायों जैसे मास्क पहनना और हाथ धोना, दो गज़ की दूरी बनाए रखना आदि में ढिलाई आ गयी थी। इसलिए लोगों को फिर से सजग करने का काम मीडिया को अपने कंधों पर लेना होगा। उन्होंने कहा कि वैक्सीन के आने से कुछ चिंता कम तो जरूर हुयी है, पर कोविड उपयुक्त व्यवहार को सख़्ती से बनाये रखना है। उन्होंने मीडिया से आग्रह किया कि वे जागरूकता फैलाने के अपने मोर्चे पर फिर से डट जाएं।

वही वरिष्ठ संचार विशेषज्ञ डॉ संजीव कुमार ने कोरोना वैक्सीन संबंधी जानकारी पत्रकारों को दी और उनके सवालों का तथ्य परख जवाब दिया। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी के इस संकट ने बच्चों, महिलाओं और पुरुषों के जोखिम को बढ़ा दिया है। मीडिया में लोगों की मानसिकता बदलने और व्यवहार को प्रभावित करने की शक्ति है। उसने हमेशा नए व्यवहारों को अपनाने और उन्हें बनाए रखने हेतु सक्षम वातावरण बनाने में एक अहम् भूमिका निभाई है। अगर मीडिया इस दिशा में इसी तरह सहयोग करता रहा, तो हम कोविड-19 की इस बीमारी को समाप्त करने में सफल जरुर होंगे। इस दौरान जालौन के वरिष्ठ पत्रकार केपी सिंह ने कहा कि वैक्सीनेशन कराने के लिए जरूरी है कि समूह में लोगों को वैक्सीनेशन कराया जाये, जिससे लोग इसके प्रति जागरूक होंगे और ज्यादा से ज्यादा वैक्सीन लगवाने के लिए घरों से निकलेंगे, वही पत्रकार अनुज कौशिक ने कहा कि लोग पहले दौर में कोरोना से भयभीत थे, इस दौरान प्रशासन द्वारा सख्ती से कंटेंटमेंट जॉन बनाकर उस इलाके को सील कर दिया जाता था, जहां पर कोरोना के मरीज निकलते थे। वही ललितपुर के पत्रकार अमित सोनी ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में कोरोना के प्रति सच है, लेकिन अन्य इलाकों में इसका असर नहीं दिख रहा है और एक साथ भीड़ वाले इलाके में दिखाई पड़ते हैं। इसके अलावा कुंदन पाल, प्रदीप कुमार त्रिपाठी, झांसी से अब्दुल सत्तार विकास शर्मा, अरविंदो घोष आदि ने भी अपने सुझाव दिए।

 

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