पंचायतों के फंड को लेकर सरकारी अमले की बल्ले-बल्ले, फर्जी बिलिंग के जरिये हो रही बंदरबांट

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उरई। पंचायतों में उपलब्ध फंड को लेकर खंड विकास अधिकारी, सहायक विकास अधिकारी पंचायत और सचिवों की बल्ले-बल्ले हो गई है। नये प्रधानों के कार्यभार संभालने के पहले पंचायत के खाते को निल करने के टारगेट के तहत काम किया जा रहा है। इस व्यग्रता के कारण जिले के हर ब्लाक में बजट की बंदरबांट मची है।
लगभग 6 महीने से पंचायतें भंग हैं। नये चुनाव होने तक तदर्थ व्यवस्था के लिए पंचायतों का कार्य संचालन प्रशासकों को सौंप दिया गया था। इस बीच प्रत्येक पंचायत में केन्द्र और राज्य सरकारों के अनुदान की छमाही किस्त जमा हुई है।
वैसे तो प्रधान न होने के कारण हर पंचायत में कार्य अवरूद्ध हैं जिससे फंड पंचायत के खाते में ही जाम रहना चाहिए था लेकिन फंड की लूट खसोट के लिए तात्कालिक आवश्यकता की आड़ में सरकारी अमले ने जमकर फर्जी बिलिंग कर डाली है।
नये प्रधानों के निर्वाचन के बाद भी इस मामले में सब्र नहीं किया जा रहा है। हर पंचायत के अवशेष धन को इस बीच कराये गये कार्यो के भुगतान और कागजी सेनिटाइजेशन आदि में ठिकाने लगाया जा रहा है। नव निर्वाचित प्रधानों में भी विरासत में पंचायत का निल खाता मिलने के आसार की वजह से बेचैनी है। उनका कहना है कि गांव के लोगों की उनसे बहुत अपेक्षायें हैं। जिस पर खरा साबित करने के लिए वे फंड होने पर शपथ लेते ही कार्य शुरू करा देने के मूड में थे लेकिन अब लगता है कि उन्हें अगली किस्त आने तक निठल्ला रहना पड़ेगा जिसका खामियाजा उनको लोगों के असंतोष के रूप में भोगना पड़ सकता है। इस संदर्भ में सबसे ज्यादा शिकायतें माधौगढ़ और रामपुरा विकास खंड की ग्राम पंचायतों की है। जिलाधिकारी का ध्यान इस ओर आकर्षित कराकर उनसे हस्तक्षेप करने की मांग की गई है।

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Harendra singh
Harendra singh
27 days ago

लूट मची है, सरकार को ऐसे चोरों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई करनी चाहिए