प्रधान उपचुनाव ग्राम सभा कूंड़ा: हाथों से फिसली विरासत बचाने के लिए है मीनू की जंग

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* दिवंगत प्रधान मैदादेवी की पुत्रवधु के लिए बड़ी चुनौती है आसन्न चुनाव
* शपथ भी नहीं हो पाई थी कि लील लिया था नवनिर्वाचित प्रधान को क्रूर कोरोना ने
कोंच। विकास खंड कोंच की ग्राम सभा में होने जा रहा प्रधानी का चुनाव भी काफी दिलचस्प हो गया है। महिला के लिए आरक्षित इस सीट पर दो प्रत्याशी चुनाव मैदान में आमने सामने की भिड़ंत में हर तरह के दांव पेंच आजमा रहे हैं। इस चुनाव में प्रत्याशी मीनू चौहान के सामने परिवार में आकर खिसक गई प्रधानी की विरासत को फिर से हासिल करने की बड़ी चुनौती है। जबकि दूसरी प्रत्याशी पुष्पा देवी की भी कोशिश पिछले चुनाव की हार को किसी तरह जीत में तब्दील करने की है।
विकास खंड कोंच की ग्राम पंचायत कूड़ा में होने जा रहे उपचुनाव में ‘कौन बनेगी गांव की मुखिया’ को लेकर रस्साकशी जारी है और मतदाताओं को रिझाने के लिए दोनों प्रत्याशियों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। पिछले दिनों हुए पंचायत चुनाव में विजयी रही प्रत्याशी मैदादेवी की शपथ लेने से पहले ही कोरोना से मौत हो जाने कारण रिक्त हुई इस ग्राम सभा में प्रधान के लिए उपचुनाव हो रहा है। इनमें एक प्रत्याशी दिवंगत महिला प्रधान के परिवार से है जो अपनी विरासत बचाने की जंग लड़ रही है और उसे गांव के मतदाताओं पर भरोसा है कि असमय उनके परिवार के पास आकर अचानक खिसकी गांव चलाने की बागडोर वे पुनः उनके ही हाथों में थमाएंगे। जबकि दूसरी तरफ उनकी एकमात्र प्रतिद्वंद्वी भी चुनाव अपने पक्ष में करने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाए हैं।
गौरतलब है कि पिछले दिनों निपटे पंचायत चुनाव में जीती महिला प्रत्याशी मैदादेवी की कोरोना संक्रमित हो जाने के चलते मृत्यु हो गई थी और गांव की छोटी सरकार बनने से पहले ही प्रधान पद खाली हो गया था। जिसके लिये अब उपचुनाव होने जा रहा है। विकास खंड कोंच की ग्राम पंचायत कूड़ा में प्रधानी के लिए जारी चुनाव प्रक्रिया में दो प्रत्याशी मीनू चुनाव चिह्न इमली और दूसरी प्रत्याशी पुष्पा देवी ओसाता हुआ किसान चुनाव चिन्ह के साथ मैदान में किस्मत आजमा रही हैं। दोनों ही प्रत्याशी अपने अपने समर्थकों की टीमों के साथ मतदाताओं का रुख अपनी तरफ करने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाए हैं। ऐसे में ऊंट किस करवट बैठता है, यह फैसला तो गांव मतदाताओं के हाथों में है लेकिन दोनों ही प्रत्याशी अपनी अपनी जीत के प्रति पूरी तरह आश्वस्त हैं। इस छोटी सरकार के लिए कौन मुफीद होगा, इसका मन ही मन आकलन वहां के मतदाता जरूर कर रहे हैं। मतदाताओं का रुख भांप पाना फिलहाल राजनैतिक पंडितों के लिए भी टेढी खीर बना हुआ है। गांव के मतदाता अपने सारे पत्ते आस्तीनों के अंदर किए हैं, ऐसे में वे किसे अपना मुखिया बनाना पसंद करते हैं, यह तो आने वाला वक्त ही तय करेगा। यहां यह बताना भी समीचीन है कि गांव की जनता इस ‘छोटी सरकार’ की बागडोर आम पंचायत चुनाव में मीनू के परिवार को सौंप चुकी थी लेकिन शपथ से पहले ही प्रधान का आकस्मिक निधन हो गया था। ऐसे में मीनू के लिए यह उपचुनाव अपनी हाथ से फिसली विरासत को पुनः प्राप्त करने की चुनौती बना हुआ है। दूसरी तरफ पुष्पा देवी पिछली हार को अबकी दफा जीत में बदलने की जुगत में हैं। हालिया निपटे चुनाव में पुष्पा मैदादेवी से हार गईं थीं। फिलहाल, 12 जून को गांव के वोटर मतदान के जरिए अपने भावी प्रधान का भाग्य तय कर देंगे जिसका खुलासा 14 जून को हो जाएगा।