भूमि सरंक्षण विभाग में भारी गोलमाल,सूचना अधिकार में भी करते मनमानी

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माधौगढ़-उरई |  भूमि संरक्षण विभाग में सब गोलमाल है। यह सबको पता है। इसके बावजूद विभाग की कोई जवाबदेही तय नहीं है। जिले की जिलाधिकारी भी भूमि संरक्षण विभाग के भ्रष्टाचार पर मौन साधे हुए हैं। माधौगढ़, रामपुरा और नदीगांव ब्लॉक के गांव में भूमि संरक्षण विभाग द्वारा कराए गए कार्यों में जमकर भ्रष्टाचार है। इसको लेकर लगातार शिकायतें और आवाज उठाई जा रही है। लेकिन विभाग पर कोई असर नहीं हो रहा है। विभाग द्वारा खुदवाये गए तालाबों में तो इतना भ्रष्टाचार है कि अगर सही मायने में जांच हो जाए तो आधे से ज्यादा अधिकारी जांच के दायरे में आ जाएंगे और किसानों से रिकवरी तक हो सकती है। लेकिन कमीशन बाजी के खेल में सब चुप हैं। असहना निवासी राम कुमार भारद्वाज ने भूमि संरक्षण विभाग में हुए भ्रष्टाचार के लिए सूचना अधिकार के तहत तालाबों की जानकारी मांगी थी लेकिन विभाग ने 29 दिन बाद सूचना मांगने के लिए ₹54 की डिमांड की लेकिन समय बढ़ाने की दृष्टि से न तो यह बताया गया कि चालान किस में जमा करना है? न ही विभाग के माध्यम से यह जानकारी दी गई कि अपीलीय अधिकारी कौन है? बल्कि व्यक्तिगत तौर पर जब कार्यालय में सूचना अधिकार अधिनियम के तहत यह पूछा गया कि अपीलीय अधिकारी कौन है? तो सभी एक दूसरे का मुंह ताकते रहे और किसी ने सूचना अधिकार अधिनियम के तहत कोई जानकारी नहीं दी। बल्कि बाहर कहीं कोई सूचना पट्टिका भी नहीं थी। इस कारण यह लगता है कि भूमि संरक्षण विभाग पूरी तरह से भ्रष्टाचार में संलिप्त है और कोई कुछ ना कर पाए इसलिए जानबूझकर शिकायतकर्ता को परेशान किया जाता है।