शिक्षा , चिकित्सा और न्याय को आम आदमी के लिए दूभर बना कर की जा रही भगत सिंह के सपनों की हत्या

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उरई। नौजवान भारत सभा की ओर से शहीदे आज़म भगत सिंह के 114वे  जन्म दिवस  के अवसर पर चलाई जा रही “शहीद यादगारी यात्रा” के तहत राहिया गांव, जिला परिषद व भगत सिंह पार्क में  नुक्कड़ सभाएं, पोस्टर प्रदर्शनी, पर्चे आदि के माध्यम से भगत सिंह और उनके साथियों की विरासत से लोगों को परिचित कराया जा रहा है। सभा में बात रखते हुए वक्ताओं ने बताया कि जिस समाज का सपना भगत और उनके साथी देख रहे थे वो समाज आज़ादी के 74  सालों के बाद भी नहीं बन पाया है। आज से 95 साल पहले भगत सिंह के संगठन के घोषणा पत्र में एक समान शिक्षा, एक समान न्याय का जिक्र था। लेकिन दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में आज भी शिक्षा, न्याय और चिकित्सा जैसी बुनियादी चीज देश की जनता के लिए दूर की कौड़ी बनी हुई है। आज भी समाज में लूट -शोषण  -उत्पीड़न है और इसलिए आज भी देशी हुक्मरान लोगों के बीच जाति और धर्म के नाम पर नफ़रत फ़ैलाने में लगे हुए हैं। ऐसे में ये जरूरी है कि हम भगत सिंह और उनके साथियों के विचारों को छात्रों- नौजवानों, कर्मचारियों और देश की मेहनतकश जनता तक लेकर जाएं और उनके विचारों व सपनों को लोगों के दिलों में जिंदा करें। भगत सिंह ने जेल से भेजे गए पत्र में नौजवानों से कहा था – ” इस समय हम नौजवानों से यह नहीं कह सकते कि वे बम और पिस्तौल उठायें। आज विद्यार्थियों के सामने इससे भी महत्त्वपूर्ण काम है।  राष्ट्रीय इतिहास के इन कठिन क्षणों में नौजवानों के कन्धों पर बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी आ पड़ेगी। यह सच है कि स्वतन्त्रता के इस युद्ध में अग्रिम मोर्चों पर विद्यार्थियों ने मौत से टक्कर ली है। क्या परीक्षा की इस घड़ी में वे उसी प्रकार की दृढ़ता और आत्मविश्वास का परिचय देने से हिचकिचायेंगे?

 

नौजवानों को क्रान्ति का यह सन्देश देश के कोने-कोने में पहुँचाना है, फ़ैक्टरी-कारख़ानों के क्षेत्रों में, गन्दी बस्तियों और गाँवों की जर्जर झोंपड़ियों में रहने वाले करोड़ों लोगों में इस क्रान्ति की अलख जगानी है जिससे आज़ादी आयेगी और तब एक मनुष्य द्वारा दूसरे मनुष्य का शोषण असम्भव हो जायेगा।” इसी संदेश को लेकर  शहीद यादगारी यात्रा के तहत लोगों के बीच जाने का अभियान ब्रिजेश राव के नेतृत्व में क्रांतिकारी विचारधारा से लैस नौजवानों द्वारा चलाया जा रहा है |