केरल के राज्यपाल ने शाह आलम को सामाजिक सहभागिता सम्मान से नवाजा

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उरई। जालौन जनपद को कर्मभूमि मानने वाले चर्चित क्रांतिकारी लेखक और दस्तावेजी फिल्म निर्माता शाह आलम को ‘सामाजिक सहभागिता सम्मान’ से नवाजा गया है। यह सम्मान केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान के हाथों से दिया गया है। प्रसिद्ध लोकतंत्र सेनानी और गांधीवादी विचारक राजनाथ शर्मा की अगुवाई में वर्ष 1978 से गांधी जयंती समारोह ट्रस्ट, बाराबंकी राष्ट्रीय स्तर पर शख्सियतों को सम्मानित करता रहा है।

 

शाह आलम ने डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय, अयोध्या और जामिया मिल्लिया इस्लामिया केन्द्रीय विश्वविद्यालय, नई दिल्ली से पढ़ाई की है। वह एक घुमंतू पत्रकार के रुप में करीब दो दशक से दस्तावेजी फिल्मों के निर्माण प्रकिया में सक्रिय हैं। सामाजिक सरोकारों के लिए 2002 में चित्रकूट से अयोध्या तक, 2004 में मेंहदीगंज से सिंहचर तक, 2005 में इंडो-पाक पीस मार्च दिल्ली से मुल्तान तक, 2005 में ही सांप्रदायिक सौहार्द के लिए कन्नौज से अयोध्या, 2007 में कबीर पीस हॉर्मोनी मार्च अयोध्या से मगहर, 2009 में कोसी से गंगा तक पैदल यात्रा की है। वहीं उत्तर प्रदेश के पहले फिल्म समारोह की वर्ष 2006 से अयोध्या फिल्म फेस्टिवल की नींव रखी। 2009 में लावारिसों के वारिस शरीफ चाचा पर उनकी दस्तावेजी फिल्म काफी चर्चा में रही। सात वर्षों से चौरी चौरा इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल का आयोजन भी कर रहे हैं। शाह आलम ने वर्ष 2016 में 2800 किमी से अधिक दूरी साइकिल से तय करके चंबल के बीहड़ो का दस्तावेजीकरण किया। ‘चंबल जनसंसद’ और आजादी के 70 साल पूरे होने पर ‘आजादी की डगर पे पांव’ 2338 किमी की यात्रा क्रांतिकारियों के भूलने के विरुद्ध की। मातृवेदी-बागियों की अमरगाथा, चंबल मेनीफेस्टो, बीहड़ में साइकिल, आजादी की डगर पे पांव,  कमांडर-इन-चीफ गेंदालाल दीक्षित आदि पुस्तकों के लेखक हैं। चंबल संग्रहालय, के आसिफ चंबल इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल, पंचनद दीप पर्व के संस्थापक, चंबल लिट्रेरी फेस्टिवल और चंबल मैराथन के संस्थापक भी हैं। साथ ही प्रेस क्लब आफ इंडिया, नई दिल्ली के सद्स्य हैं।