साहित्य बेबाक दर्पण, विसंगतियों को बिना लाग लपेट के करता है उजागर

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उरई. जिला पंचायत अध्यक्ष घनश्याम अनुरागी ने कहा है कि साहित्य बेबाक होता है. सच्चे कवि कबीर जैसे होते हैँ जो विसंगतियों पर प्रहार करते हुए किसी की नाराजगी की परवाह नहीं करते.
वे जिला एकीकरण समिति के कौमी सप्ताह के तहत रविवार को उरई सिटी स्कूल में आयोजित कवि सम्मेलन, मुशायरा के गंगा जमुनी आयोजन में कवियों और शायरों को सम्मानित करते हुए सम्बोधित कर रहे थे, वयोवृद्ध कवि और अधिवक्ता यज्ञदत्त त्रिपाठी ने अध्यक्षता की जबकि संचालन पहचान संस्था के अध्यक्ष शफीकुर्रहमान कशफी ने किया.
ज़िला एकीकरण समिति के संयोजक वरिष्ठ स्तंभकार के, पी, सिंह के संयोजन में और साहित्त्य संस्था पहचान के आयोज में होने वाले कवि सम्मेलन मुशायरे की शुरुआत कवियत्री रुचि बाजपेई की सरस्वती वंदना और जनपद में रफी के नाम से मशहूर मिर्ज़ा साबिर बेग की नातेपाक,जब करम होता है हालात बदल जाते हैं,, से हुई
इसके बाद संचालक ने काव्यपाठ के लिए सिद्धार्थ त्रिपाठी को बुलाया उन्होनो पढा, है सत्ता का संघर्ष ज़ाति धर्म गोट है,,इस आपसी फसाद की जड़ केवल वोट है,,इसके बाद शिखा गर्ग ने पढ़ा,गोरों को छकाती हुई मार भूमि पे गिराती हुई,घोड़े पे सवार चली चाल वो तूफानी थी,,फिर फरीद अली बशर ने सुनाया,आंगन की तेज़ धूप है मुफ़लिस की चांदनी,नंगी हक़ीक़तों को छुपाऊँ मैं कहाँ तक,,अनुज भदौरिया ने पढ़ा,तोड़ विषमता की दीवारें आपस की सारी तकरारें,हम बन्धुत्व भावना लेकर सामाजिक सौहार्द बनाएं,फिर रुचि बाजपेई ने पढ़ा आज़ादी के महायुद्ध में रण कौशल दिखलाया,हंसते हंसते हुए निछावर देश आज़ाद कराया,,फिर कृपाराम किरपालु ने पढ़ा,अन्यायी का होएगा अबकी पत्ता साफ,इस चुनाव में करेगी जनता ही इंसाफ,फिर सन्चालन कर रहे पहचान के अध्यक्ष कशफी ने पढ़ा,अपने मिटने का हमें ग़म नहीं मिट जाएंगे,अपना मिटता हुआ किरदार बचाने के लिए,,फिर वरिष्ठ कवियत्री माया सिंह ने पढ़ा,आओ चलकर प्रेम का दर्पण उन्हें अर्पण करें,दो दिलों के बीच में दीवार ये अच्छी नहीं,आज के कवि वीरेंद्र तिवारी ने पढ़ा,मंदिर मस्ज़िद गुरुद्वारे से यह पैगाम सुनाना है,हिन्दू मुस्लिम सबको मिलकर अपना देश बचाना है,,उस्ताद शायर साक़ी साहब ने सुनाया,फ़र्क़ कुछ नहीं पड़ता हो जो पैरहन मैला,आदमी न होने दे अपना साफ मन मैला,,ज़िले के वरिष्ठ गीतकार विनोद गौतम ने पढ़ा,ज़ाति है जिसकी मुहब्बत धर्म बस ईमान है ,देश वो भारत हमारा मुल्क हिंदुस्तान है,, सुरेशचन्द्र त्रिपाठी ने पढ़ा हम जगत कल्याण की शुभकामना करते रहेंगे,स्वल्प साधन ही सही पर साधना करते रहेंगे,,प्रेम नरायण ने पढ़ा, खड्ग कृपाण कटारी लेकर टूट पड़ी झांसी की रानी,अंत मे अध्यक्षता कर रहे यगदत्त त्रि पाठी ने अध्यक्ष उद्बोधन के साथ पढा,इस भारत का भरत वही जो दशन सिंह के गिनता,इस भारत का भरत वही है जिसे देश की चिंता ,,
वही कई और शायर कवियों ने काव्यपाठ किया अशोक होतवानी ने जिला पंचायत अध्यक्ष घनश्याम अनुरागी और के,पी,सिंह जी को स्मृति चिन्ह भेंट किये