एकदलीय शासन व्यवस्था किन लोगों को रास आ रही है

पश्चिम बंगाल में विधान सभा चुनाव के चैथे चरण में कूच बिहार में जो हिंसा हुई उससे यह बात पूरी तरह उजागर होकर सामने आ गई है कि राज्य में चुनाव नहीं युद्ध हो रहा […]

अब नहीं होते शब्दों पर शास्त्रार्थ 

संचार क्रांति से सूचनाओं के हुए महा विस्फोट से भारतीय खासकर हिंदी पत्रकारिता वैश्विक जरूर हो चली है लेकिन इसकी दृष्टि संकुचित और लक्ष्य सीमित होते जा रहे हैं. यकीनन पूरी दुनिया में हिंदी बोलने […]

जगम्मनपुर में दारू मुर्गा पर भारी पड़ रहा शांतेलाल का विजन

देश के कर्णधारों ने कभी सत्ता के विकेंद्रीकरण का स्वप्न देखा था और ग्राम स्तर तक सरकार को पहुचाने के लिए ग्रामपंचायत की व्यवस्था की थी। संविधान सभा की बहस में गाँधीवादी गाँव को राष्ट्र […]

उपभोक्तावादी दैत्य की नकेल कसने के लिए सामने आ रहा है सनातनी धर्म

इस्लामी उसूलों की आधुनिक आतंकवादी परिणतियां अमेरिका की देन हैं। सोवियत कम्युनिष्ट प्रभाव को छिन्न भिन्न करने के लिए सीआइए ने इस्लामी सिद्धांतों की व्याख्याओं को तोड़ा मरोड़ा और यह शैतानी साजिश जब विकराल हो […]

सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को मारीचों ने कैसे चुरा लिया, चार्वाकवादी पैटर्न पर चल रही सरकार की नीतियों का अजीबो गरीब लब्बोलुआब

  ऋषियों की लीक से हटकर भी एक परंपरा रही है। इस परंपरा के प्रतिनिधि ऋषियों की समूह वाचक संज्ञा लोकायत कही गई है। इस परंपरा के एक प्रख्यात ऋषि हुए हैं- चार्वाक। उनका चर्चित […]

पंचायत चुनाव और राजनीति का अधोगामी नीति शास्त्र

        उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों का बिगुल गत 26 मार्च को इसकी अधिसूचना जारी होने के साथ ही बज गया है। इसके कारण होली के त्यौहार पर चुनावी माहौल भारी […]

औपनिवेशिक शोषण जैसी नीतियों से बाज आये सरकार

पेट्रोल की कीमतों के शतक पार करने के साथ ही एक इतिहास रच गया है। भारत में बुलेट टेªन के इस जमाने में मंहगाई भी बुलट रफ्तार से लोगो की जिन्दगी कुचलने के लिये दौड […]

विधानमण्डल की कार्यवाही के कवरेज से मीडिया को रोकने की कोशिश

केन्द्र और उत्तर प्रदेश की सत्तारूढ पार्टी को सबसे ज्यादा घृणा माक्र्सवादी विचार धारा से है लेकिन इस मामले में वह विरोधाभासों से घिरी नजर आती है। राष्ट्रवाद को यह पार्टी और उसकी सरकारे सर्वोपरि […]

गांधीजी की हत्या के मामले में सरदार पटेल का लौह पुरूष का मुलम्मा कैसे उतरा , अपराध बोध के चलते संघ पर लगाया प्रतिबन्ध

गांधी जी की हत्या को अब 70 साल से अधिक का समय हो चुका है। इस बीच देश की राजधानी दिल्ली में यमुना नदी में न जाने कितना पानी बह चुका है। गांधी जी की […]

किसानांे की टैªक्टर परेड में हुयी हिंसा क्या पूर्व नियोजित साजिश थी ?

पिछली 26 जनवरी को देश की राजधानी में किसानो की टैªक्टर परेड के दौरान हुयी कुछ अप्रिय घटनाओं के बाद कृषि कानूनों के खिलाफ 62 दिन से चल रहे आन्दोलन की तस्वीर अचानक पलट गयी […]