संपादकीय

कटुता की राजनीति के खिलाफ जनादेश को स्वीकार नहीं कर पा रहे मोदी

लोकसभा चुनाव का इस बार का जनादेश कटुता की राजनीति के खिलाफ था और सत्तारूढ़ पार्टी को यह नसीहत देने के लिए था कि वह देश के हित, सुरक्षा और विकास के लिए विवादों से परे होकर काम करे ताकि अनावश्यक टकराव में सरकार और राजनीतिक शक्तियों की ऊर्जा बर्बाद
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अधिकारियों की मनमानी को लेकर असहाय क्यों हो रही है सरकार

औरेया में डीएम और पीडब्ल्यूडी के अधिशाषी अभियंता के बीच छिड़े विवाद ने प्रदेश में नौकरशाही की राजशाही प्रवृत्ति की कई परतें खोल डाली हैं। औरेया में महिला जिलाधिकारी नेहा प्रकाश कार्यभार संभाले हुए हैं जिनकी रिपोर्ट पर पिछले दिनों लोक निर्माण विभाग के प्रांतीय खंड के अधिशाषी अभियंता अभिषेक
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संविधान पर खतरे के भय ने सरकार के लिए पैदा की मुश्किलें

18वीं लोकसभा के गठन के लिए चल रहा चुनाव लगभग पूरा हो चुका है। इस चुनाव में मोदी सरकार सलामत रह पाती है या विपक्ष उसका ताज हथियाने में कामयाब होता है इस प्रश्न का उत्तर अभी भविष्य के गर्भ में है लेकिन मोदी और उनके सहयोगी दावा कुछ भी
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माफिया कारपोरेटवाद के खिलाफ युवाओं का असंतोष फूटा

  65 प्रतिशत से अधिक युवा आबादी वाले इस देश में बेरोजगारी का मुद्दा चुनाव में निर्णायक होना ही चाहिए था लेकिन पिछले एक दशक में राष्ट्रवाद और सांस्कृतिक अभिमान जैसे मुद्दों का तूफान इतना जोर पकड़ गया था कि जीवन संघर्ष के असल मुद्दों को लेकर लोगों में सेंसेशन
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विपक्ष की पिच पर जाकर खेलने को मजबूर हो चुकी भाजपा

गरमाते चुनावी माहौल के बीच सत्ता पक्ष और विपक्ष के वाकयुद्ध का तीखापन बढ़ता जा रहा है लेकिन इस बार विपक्ष की रणनीति 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव से अलग है जिसके चलते सत्तापक्ष उसे अपनी पिच पर घेरने में अभी तक नाकाम बना हुआ है। वर्तमान लोकसभा चुनाव
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वर्तमान चुनाव में प्रभावी हुआ आर्थिक सर्वे का मुद्दा बन रहा सरकार की गलफांसी

भ्रष्टाचार और मुनाफा खोरी की अनियंत्रित लूट के कारण पूंजी और संपत्ति का देश में जबरदस्त केन्द्रीयकरण हो रहा है। ताजा आंकड़ों के अनुसार भारत में कुल पूंजी का 40 प्रतिशत अमीर आदमियों क कब्जे में चला गया है जबकि देश की कुल आमदनी में 22 प्रतिशत हिस्सा इन धनाढ़यों
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क्या मोदी सरकार भ्रष्ट तरीके से संपत्ति जमा करने वालों को हित रक्षा की गारंटी

लोकसभा के चुनावी युद्ध का घमासान चरम पर पहुंच रहा है। प्रतिस्पर्धी दल एक दूसरे को सनसनीखेज आरोप लगाकर घेरने में लगे हैं। यहां तक कि उच्च पदों पर आसीन महानुभाव भी इसमें पीछे नहीं हैं। उन्हें यह भी भय नहीं है कि अति उत्साह से वे अपने पद की
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संघः क्या गम है जो छुपा रहे हो

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की अपने शताब्दी वर्ष में लो प्रोफाइल में रहने की घोषणा से उसके करोड़ों श्रृद्धालुओं और समूचे भाजपा संगठन को झटका लगा है। 2025 में संघ की स्थापना के 100 वर्ष पूरे हो जायेंगे। अब जबकि केन्द्र में और अधिकांश राज्यों में सत्ता का नियंत्रण पूर्ण
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ईवीएम मुकद्दमें में सुप्रीम कोर्ट के जजों की नसीहत का तोड़ क्यों नहीं विरोधी खेमे

ईवीएम को लेकर एडीआर व अन्य संस्थाओ द्वारा उच्चतम न्यायालय में दायर याचिकाओं की सुनवाई दो सदस्यीय खंडपीठ कर रही है जिसमें जस्टिस संजीव खन्ना व जस्टिस दीपांकर दत्ता शामिल हैं। भारत में हाल में कुछ उच्च न्यायालयों द्वारा प्रदर्शित विचित्रताओं को छोड़ दें तो कुल मिलाकर देश की न्याय
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