खाते से ट्रांसफर करके लाखों की रकम पार करने का धंधा पनपा
उरई। किसानों और ग्रामीणों की मेहनत की कमाई खातों से गोल कर दी जाने की जिले में बढ़ती घटनाओं ने बैंकों पर से जनमानस का विश्वास हिला दिया है। फिर भी पुलिस और प्रशासन इन मामलों में कार्रवाई की तत्परता नहीं दिखा रहा है।
कुठौंद थाने के भदेख निवासी रामसिंह कुशवाहा ने पिछले वर्ष दो लाख रुपये की लिमिट का अक्षय कृषि किसान क्रेडिट कार्ड बनवाया था लेकिन जरूरत न पडऩे की वजह से तब उन्होंने इसमें से कोई रकम नहीं निकाली थी। हाल ही में उन्हें जरूरत महसूस हुई तो ïवे क्रेडिट कार्ड से रुपये निकालने के लिये गत 21 नवम्बर को इलाहाबाद बैंक की कुठौंद शाखा में गये। जहां उन्हें जानकारी दी गयी कि उनके खाते से गत वर्ष 13 नवम्बर को रंधीरपुर के निवासी राजवीर सिंह पुत्र अनिरुद्ध सिंह के खाते में 1 लाख 70 हजार रुपये ट्रांसफर किये जा चुके हैं। यह जानकारी पाकर उनके होश उड़ गये और उन्होंने शिकायत की कि जब मैंने ट्रांसफर के किसी कागज पर हस्ताक्षर नहीं किये तो यह कैसे कर दिया गया। राम सिंह ने तत्कालीन बैंक मैनेजर व अन्य बैंक कर्मियों की इसमें साठगांठ की आशंका प्रकट करते हुए मुकदमा दर्ज कराने के लिये 24 नवम्बर को कुठौंद थाने में प्रार्थना पत्र दिया था लेकिन आज तक मुकदमा दर्ज नहीं हो पाया है जबकि वे डीएम और एसपी को भी इस सम्बन्ध में प्रार्थना पत्र भेज चुके हैं। राम सिंह ने बताया कि उन्होंने एलडीएम सिद्धार्थ पाल से भी इस पर फोन से बात की थी लेकिन सिद्धार्थ पाल ने कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया। गौरतलब है कि सिद्धार्थ पाल की भोंदू इमेज के कारण ही जब से वे एलडीएम के रूप में यहां पदस्थापित हुए हैं। तब से इलाहाबाद बैंक के शाखा प्रबंधकों की निरंकुशता चरमसीमा को पार कर चुकी है। राम सिंह ने बैंकिंग लोकपाल को भी इस मामले में शिकायत भेज दी है। उधर बैंक अधिकारियों और प्रशासन व पुलिस की ढील की वजह से राम सिंह को रंधीरपुरा से धमकी भरे संदेश भेजे जाने लगे हैं कि वे कार्रवाई में फौरन थम जायें वरना उनके साथ कोई भी अनहोनी हो सकती है।
एक अन्य घटना में कुठौंद निवासी आजाद सिंह के साथ तीन लाख रुपये की धोखाधड़ी कर दी गयी। आजाद सिंह का इलाहाबाद बैंक की कुठौंद शाखा में ही खाता है। जिसमें वे 19 नवम्बर को 3 लाख रुपये की चेक लगाकर भुगतान निकालने गये थे लेकिन मैनेजर ने उनसे कहा कि उनके खाते में पर्याप्त धनराशि नहीं है और चेक वापस कर दी। मैनेजर ने बताया कि उनके खाते से तीन लाख रुपये पहले ही किसी दूसरे खाते में स्थानांतरित हो चुके हैं। वे अचरज में पड़ गये क्योंकि उन्होंने भी किसी को कोई पैसा ट्रांसफर नहीं किया। श्री आजाद ने अपने खाते का स्टेटमेंट निकालने के लिये बैंक में तत्काल प्रार्थना पत्र दिया लेकिन आज तक उनको स्टेटमेंट नहीं दिया गया है। उनका कहना है कि उनके साथ सरेआम धोखाधड़ी हुई है और इस तरह की घटना से न केवल उनका बल्कि वे जिस-जिस को बता रहे हैं उन सभी का विश्वास सरकारी बैंकों पर से उठता जा रहा है। फिर भी बैंक प्रबंधन इसको गम्भीरता से नहीं ले रहा है।
गौरतलब है कि बैंकों के इस लचर प्रशासन की वजह से ही इलाहाबाद बैंक की बाबई शाखा के पूर्व प्रबंधक शेर सिंह ने 2007 में अपनी रसियागीरी में लाखों रुपये जालसाजी करके किसानों के खाते से निकालकर भड़ुओं पर लुटा दिये थे। हालांकि बाद में उसे जेल जाना पड़ा था लेकिन इससे क्या होता है। उसके साथ-साथ दर्जनों बेकसूर किसानों को भी बर्बाद होना पड़ा। फिर भी लीड बैंक कहलाने वाली इलाहाबाद बैंक के प्रबंधन ने कोई सबक नहीं लिया और काठ के उल्लू बड़ी कुर्सियों पर भेज दिये जिससे धोखाधड़ी का नया इतिहास रचे जाने की फिर से शुरूआत हो गयी है।







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