उरई। जनपद जालौन के परगना कालपी अन्तर्गत ग्राम कोहना के अधिसंख्य निवासियों ने अभी तक जलता हुआ बल्व नहीं देखा। इस गांव के वह लोग जो गांव से बाहर जाते रहते हैं वह इसका अपवाद हैं। कारण सिर्फ इतना है कि प्रशासन ने इस गांव का विद्युतीकरण कराने में कोई रुचि ही नहीं ली। यह बीहड़ी भूमि जो कि ऊंची-नीची और संसाधनों के अभाव के कारण बंजर अवस्था में है अपने निवासियों को भी आदिम स्थिति में बनाये है। तय है कि जब बिजली नहीं है तो वहां ट्यूबवेल भी नहीं होंगे। फिर वह चाहे सरकारी हों या निजी। वहां जितनी भी खेती की जमीन है वह आकाश से होने वाली वर्षा तथा माइनर से मिलने वाले पानी के भरोसे ही है। विद्युत सम्बन्धी उद्योग धंधे भी वहां संभव नहीं हैं। यदि गांव का विद्युतीकरण हो जाये तो नलकूपों के जरिये खेती का रकवा भी बढ़ जायेगा तथा अन्य छोटे-छोटे विद्युत आधारित धंधे भी कहां चल पड़ेंगे। गांव की बेरोजगारी भी खत्म होगी और गांव के युवाओं का शहरों की ओर जारी पलायन भी खत्म हो जायेगा। गांव के विद्युतीकरण से सबसे बड़ा लाभ गांव वालों को यह होगा कि फिर लोग अपनी लड़कियों का रिश्ता लेकर कुहना आने लगेंगे जो अभी नहीं आते हैं।
ग्राम कुहना के निवासियों ने गांव के विद्युतीकरण को लेकर उक्त आशय का अपना दर्द पत्र के जरिये राज्यपाल उत्तरप्रदेश को भेजा है।







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