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न्यामतपुर-उरई। ग्राम पिथऊपुर में 45 वर्षों से एक बार को छोड़कर बराबर एक ही परिवार का प्रधान पद पर कब्जा पुरानी पंचायत परंपरा की याद दिलाता है। जब गांव का मुखिया सर्वमान्य व्यक्तित्व होता था।
ग्राम पिथऊपुर को इलाके के राजा पृथु चंदेल ने बसाया था जो पांच भाई थे। सभी भाइयों के नाम पर एक-एक गांव बना। पृथू के नाम पर पिथऊपुर, दूसरे भाई खडग़ सिंह के नाम पर खडग़ुई, विहम सिंह के नाम पर बेहमई, नवाब सिंह के नाम पर नवासी और अनूप सिंह के नाम पर अनवा गांव हैं।
1951 में आजादी के बाद हुए प्रधानी के पहले चुनाव में हनुमान पाठक प्रधान बने। इसके बाद 1956 में गुलाब सिंह के हाथ प्रधानी आयी तो ऐसा सिलसिला चल पड़ा कि बराबर आज तक उन्हीं के घर में प्रधानी बनी हुई है। एक बार जब अनुसूचित जाति सुरक्षित प्रधानी हो गयी थी उस समय उन्हीं के गोल के एक बाल्मीकि को इस पद पर पदासीन होने का अवसर मिला। उसके बाद से फिर उन्हीं के परिवार में प्रधानी बरकरार रही। वर्तमान प्रधान राम सुमिरन सिंह इस परिवार की नवीनतम कड़ी हैं। इस बार प्रधानी का पद महिला के लिये आरक्षित होने से राम सुमिरन सिंह की पत्नी शकुंतला देवी यहां उम्मीदवार हैं।
राम सुमिरन सिंह ने बताया कि उनके पुरखे इंसाफ पसंदगी के लिये मशहूर रहे हैं। उन्होंने पंच परमेश्वर बनने के बाद हर मामले में ऐसा निर्णय दिया कि जिस पर कोई उंगली नहीं उठा सका। उसी परंपरा को वे बरकरार बनाये हुए हैं। यही कारण है कि गांव वालों की उनके परिवार के प्रति इस कदर आस्था है। गांव की हर गली को उन्होंने सीसी कराकर विकास में अपना योगदान भी साबित किया। गांव में एक चबूतरे पर शिवलिंग स्थापित है। जिसके बारे में कहा जाता है कि वह 1980 में नून नदी के किनारे अचानक प्रकट हुआ था। इसी कारण गांव में लोग सत्यवादिता का प्रमाण देने के लिये जब इस शिवलिंग को साक्षी घोषित करते हैं तो कोई उस पर अविश्वास नहीं करता।
एक हजार की मतदाता संख्या वाले गांव में सर्वाधिक सामान्य वर्ग के 600 वोटर हैं। 300 वोट अनुसूचित जाति के और 100 वोटर विभिन्न पिछड़ी जातियों के हैं।

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