
न्यामतपुर-उरई। लगातार प्राकृतिक आपदाओं की मार झेल रहे किसान सूखे की वजह से रबी की बुवाई तक होते न देख बदहवास हो रहे हैं। कई किसानों ने रबी की फसल में भी कुछ हाथ न लगने पर जान देने के अलावा कोई चारा न बचने की बात कहनी शुरू कर दी है।
प्राकृतिक आपदाओं से किसानों की बर्बादी ने क्षेत्र में भीषण रूप ले लिया है। छोटे किसान रोज मजदूरी करके अनाज खरीदकर लाते हैं तब उनके घर का चूल्हा जल पाता है। धामनी के रामेश्वर ने बताया कि जिस दिन मजदूरी नहीं मिलती उनके घर में फाकाकशी की नौबत आ जाती है। दमरास के बदन सिंह भदौरिया ने बताया कि उन्होंने रबी की बुवाई के लिये बीज खरीदने तक को कर्जा लिया है। उन्होंने कहा कि लगातार पांच फसलें बर्बाद हो जाने से उनके परिवार का बुरा हाल है।
जमलापुर के पूरन ने कहा कि उनके घर का गल्ला तो मार्च अप्रैल में ही खत्म हो गया था जबकि उस समय पकी फसल बिन मौसम बरसात और ओला पडऩे से खेत में ही जमींदोज हो गयी थी। उन्हें उम्मीद थी कि खरीफ में ठीकठाक उपज मिल जायेगी जिससे उनके परिवार का काम चल सकेगा लेकिन सूखे ने इस उम्मीद को भी डस लिया। उधर नहर आने के आसार नहीं दिख रहे। अगर यह फसल भी बेकार चली गयी तो उनके सामने जहर खाने के अलावा कोई विकल्प नहीं रह जायेगा।
एक ओर किसान क्रन्दन कर रहे हैं तो दूसरी ओर सरकारी महकमे अपनी बेढ़ंगी चाल से बाज नहीं आ रहे। क्षेत्र में तरसौर रजवाहा से सिंचाई होती है और इस रजवाहा में पानी अभी तक नहीं आया है। सूखी पड़ी नहर में उगी बड़ी-बड़ी झाडिय़ां बताती हैं कि सूखे के बावजूद नहरों के सुचारु संचालन के लिये विभाग ईमानदारी से सफाई कराने को तैयार नहीं है और टेल क्षेत्र में पानी न आने की यही मुख्य वजह साबित हो रहा है।






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