कहा, गरीब सवर्णों को आरक्षण समय की जरूरत
कोंच-उरई। संविधान दिवस पर संसद में हो रही चर्चा के दौरान बसपा सुप्रीमो मायावती ने आज तुरूप चाल चल कर विरोधियों को चारों खाने चित कर दिया है। उन्होंने गरीब सवर्णों को आरक्षण दिये जाने की मांग करके अन्य दलों के चुनावी गणित को ताश के पत्तों के महल की तरह ढेर कर दिया है। इधर सवर्णों ने इस मुद्दे को लपक कर मायावती की इस मांग पर अपना समर्थन जताया है और कहा है कि अब वक्त आ गया है जब आरक्षण नीति की आद्यंत समीक्षा हो और देश में रह रहे उन सवर्णों जिनके पास दो जून की रोटी का भी जुगाड़ नहीं है और गरीबी रेखा के नीचे यापन कर रहे हैं, का आरक्षण का लाभ दिया जाये।
यहां ब्राह्मणों की सबसे बड़ी संस्था ब्राह्मण महासभा के अध्यक्ष देवीदयाल रावत ने मायावती के इस सुझाव का जोरदार स्वागत किया है, उन्होंने कहा कि भले ही अब तक मायावती वर्ग विशेष की हितचिंतक के रूप में जानी जाती रही हों लेकिन गरीब सवर्णों को आरक्षण दिये जाने की उनकी मांग को राजनीतिक चश्मे से नहीं बल्कि सामाजिक परिस्थितियों में सामयिक रूप से उठाई गई उनकी बाजिब मांग है। गल्ला व्यापारी समिति के अध्यक्ष अजय गोयल ने भी मायावती के इस नजरिये पर अपनी सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुये कहा है कि गरीब हर तबके में होते हैं और आजादी के बाद से जारी वोट की राजनीति ने इस देश का बंटाधार कर दिया है किंतु मायावती ने यह साफ कर दिया है कि वह अब ऐसे दलों जो दूसरों का हक छीन कर आगे बढ़ने के मंसूबे पाले हैं उनकी राजनीति की दुकान अब ज्यादा दिनों तक नहीं चल पायेगी जब तक कि वे समाज के हर तबके को बराबरी के नजरिये से नहीं देखेंगे। गल्ला व्यापारी समिति के निवर्तमान अध्यक्ष अजय रावत भी मायावती के इस प्रस्ताव पर अपनी प्रतिक्रिया देने से नहीं चूके, उन्होंने कहा कि यह बिल्कुल सही समय है आरक्षण के प्रावधानों की पुनर्समीक्षा करने का। उन्होंने कहा कि हालात अब अंदर ही अंदर कोढ में बदल चुके हैं जिसका इलाज होना जरूरी है और यह तभी हो सकता है जब गरीब सवर्णों को भी आरक्षण मिले ताकि उनकी जीविका का उपार्जन हो सके। व्यापारी नेता विनोद दुवे लौना कहते हैं समाजसेवा, सामाजिक एकता और समरसता का ढिंढोरा पीटने बाले नेताओं और राजनैतिक दलों के लिये यह चेतावनी है कि समाज के सभी तबकों को समान अधिकार दिये बिना अब राजनीति में बहुत आगे तक नहीं जाया जा सकता है।







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