न्यामतपुर-उरई। क्षेत्र में ग्राम पंचायत चुनाव का परिदृश्य रोचक और रोमांचक बना हुआ है। अभैदेपुर ग्राम पंचायत में प्रधान पद महिला के लिए आरक्षित है और यहां की चारों महिला उम्मीदवारों के नाम एक ही जैसे गुडडी देवी हैं। जिससे मतदाताओं के चकरा जाने की स्थिति पैदा हो रही है।
सूखे के विकराल प्रभाव का सबसे ज्यादा असर जिन ब्लाॅकों में हैं उनमें महेबा भी शामिल है। लेकिन इस ब्लाॅक की कई ग्राम पंचायतों में प्रत्याशी प्रचार में जिस तरह से दिल खोलकर पैसा बहा रहे हैं उससे चुनाव की रंगीनी के आगे सूखे का धूमिल असर फना हो गया है।
सपा के कददावर नेेता विष्णुपाल सिंह नन्नू राजा की अटराकलां ग्राम पंचायत में प्रधान का पद अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित है। यहां एक दर्जन उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं जिनमें स्टेट बैंक आॅफ इंडिया के सेवानिवृत्त मैनेजर बद्री प्रसाद का चुनाव प्रचार सर्वाधिक भड़कीला है। उनकी बड़ी-बड़ी होर्डिंगें लोकसभा और विधानसभा के चुनाव को भी मात कर रही हैं। दूसरी ओर इसी गांव में भारत सिंह कठेरिया भी एक उम्मीदवार हैं जो पूरी तरह साधन विहीन होने के बावजूद मजबूत इरादे की वजह से चुनावी मैदान फतेह करने का मंसूबा पाले हुए हैं।
न्यामतपुर में तीन बार प्रधान रह चुके बुद्ध सिंह एक बार फिर मैदान में हैं। जो कि पुराने नेता होने के बावजूद प्रचार के लिए हाईटैक तरीके अपना रहे हैं। मतदाताओं को व्हाटसएप और फेसबुक ग्रुप के जरिए अपना नाम और चुनाव चिन्ह रटाने की उन्होंने ऐसी होड़ मचा रखी है कि अन्य उम्मीदवार परेशान हैं। हालांकि जिला पंचायत के हाल ही में हुए संघर्षपूर्ण चुनाव की सबसे ज्यादा छाया इसी गांव पर है। जिसकी वजह से न्यामतपुर का चुनावी माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है।
मलथुआ ग्राम पंचायत से राजीव पांडेय सहित 13 प्रत्याशी मैदान में हैं। राजीव पांडेय ने कुछ ही दिन पहले जिला पंचायत सदस्य का चुनाव भी पूरी दमखम से लड़ा था। उनके चुनाव अभियान में भी हाईटैक तौर-तरीकों का बोलबाला है। दमरास में प्रधान की सीट अनुसूचित जाति आरक्षित हो जाने के बावजूद 16 प्रत्याशी मैदान में हैं। सीआरपीएफ के पूर्व जवान केशव नंदन ने जोर आजमाइश के लिए यहां खुद मैदान में आने की वजाय अपनी पत्नी को प्रत्याशी बनाकर मोर्चा संभाला है।
बैलेट पेपर की सीमा से ज्यादा प्रत्याशी
उधर कदौरा ब्लाॅक की आटा ग्राम पंचायत में 47 प्रत्याशी मैदान में हैं जो कि एक रिकार्ड है। गौरतलब यह है कि अभी एक बैलेट पेपर में मात्र 45 चुनाव चिन्ह दर्ज किये जाने की व्यवस्था है। आटा में इस सीमा से अधिक प्रत्याशी होने के कारण परेशान जिला प्रशासन ने चुनाव आयोग से 47 खाने वाले 10 हजार नये बैलेट पेपर जिले में भिजवाने की व्यवस्था करने का आग्रह किया है।







Leave a comment