न्यामतपुर-उरई। विधानसभा चुनाव की तैयारियां शुरू होते ही ऊपर वालों को जिले की खस्ताहाल सड़कों की याद तो आ गई है लेकिन जिस तरीके से काम कराया जा रहा है उससे सरकार को राजनैतिक लाभ मिलने की बजाय और ज्यादा नुकसान होने की संभावना से इंकार नही किया जा सकता।
लगभग दो दशक पहले बने मलथुआ के संपर्क मार्ग की सड़क का इस बीच अस्तित्व ही समाप्त हो गया था। जिससे ग्रामीण काफी परेशान बने हुए थे। बावजूद इसके पहले किसी ने इसकी सुध नही ली। वर्तमान सरकार में लगभग साढ़े तीन वर्ष से सड़क पुर्नर्निमाण की मांग करते-करते ग्रामीणो का गला सूख गया। लेकिन सरकार और प्रशासन में से किसी को तरस नही आया। लेकिन चार वर्ष तक जनता को दुत्कारने और आखिरी वर्ष में उसे पुचकारकर चुनावी मतलब निकाल लेने की रणनीति के तहत क्षेत्र की अन्य सड़कों के साथ-साथ मलथुआ संपर्क मार्ग की सुध भी जिम्मेदारों को आ गई।
यह दूसरी बात है कि भारी भरकम बजट खर्च करके बनाये जा रहे इस संपर्क मार्ग के रोड में जमकर धांधली हो रही है। जीरा बिछाये बिना गिट्टिया डलवाकर ऊपर से डामर का हल्का छिड़काव करके काम की इतिश्री करने का प्रयास किया जा रहा है। शिशुपाल सिंह चंदेल, राजू वनाफर, आलोक वनाफर, सोनू जाटव और अनिल चैधरी आदि ग्रामीणों ने बताया कि इस तरह के घटिया निर्माण से स्थिति पहले से भी ज्यादा खराब हो जायेगी। उनका कहना है कि ग्रामीणों को ठेकेदार की करतूत की वजह से अपनी उम्मीदों पर पानी फिरता नजर आ रहा है जिसे बर्दास्त नही किया जायेगा। ग्रामीण आंदोलन की तैयारी करने के साथ-साथ सत्तारूढ़ दल के प्रति भारी नाराजगी भी जता रहे हैं।






Leave a comment