0 पूर्व फौजी ने एसपी से लगाई गुहार
उरई। प्रधानी के चुनाव में दबंग के खिलाफ पर्चा भरने के कारण पूर्व फौजी पर किये गये प्राण घातक हमले व लूटपाट के मामले में आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करने से पुलिस बच रही है। जबकि हमला इतना घातक था कि पूर्व फौजी 7 दिन तक सैनिक अस्पताल में भर्ती रहा। पुलिस की कर्तव्यहीनता की इस मिसाल से आम लोग तक उद्वेलित हैं। दूसरी ओर पूर्व फौजी ने हारकर आज एसपी के सामने हमलावरों के खिलाफ कार्रवाई की गुहार लगाई। उसे उम्मीद है कि जिले के सबसे बड़े आला अफसर उसकी हालत को देखने के बाद कोई न कोई सख्त कदम जरूर उठायेगें।
कोतवाली क्षेत्र के चकजगदेवपुर ग्राम निवासी इंदर सिंह सेवानिवृत्त फौजी हैं। उन्होंने इस बार अपने गांव के तमाम लोगों के आग्रह पर जब प्रधान बनने के लिए पर्चा दाखिल करने का मन बनाया तो बकौल उनके रामऔतार यादव उनके पास आये और उन्हें ऐसा न करने की हिदायत देने लगे। रामऔतार की दबंग छवि के कारण गांव के लोग उनसे भय खाते हैं। लेकिन इंदर सिंह ने फौजी स्वभाव की वजह से उनकी चेतावनी को नजरंदाज कर दिया। नतीजा यह हुआ कि जब पर्चा दाखिल कर वे गांव में चुनाव प्रचार में जुट गये और बड़ी संख्या में लोग उनके पक्ष में लामबंद होने लगे तो 25 नवबंर को साजिशन उन्हें रामऔतार के पक्ष के रामबहादुर व रामप्रकाश अपने घर ले गये। जहां पहले से ही रामऔतार व उनके अन्य साथी घात लगाये बैठे थे। रामऔतार हाथ में रिवाल्वर भी लिए था। जिससे उसने इंदर सिंह पर फायर किया लेकिन गोली मिस हो गई। इसके बाद उसने व उसके साथियों ने लोहे की राॅड, कुल्हाड़ी और डंडो से उसके ऊपर हमला बोल दिया। उनकी योजना उसकी हत्या करने की थी लेकिन तब तक दूसरे लोगों से जानकारी पाकर उसकी लड़कियां, लड़का व मां और अन्य लोग दौड़कर आ गये। जिसकी वजह से हमलावरों को थम जाना पड़ा। फिर भी जाते-जाते वे गालियां देते हुए उसकी सोने की चेन, 8 हजार रुपये नगद, घड़ी, मोबाइल आदि सामान लूट ले गये।
बाद में प्रार्थी को उसके परिजन उरई कोतवाली लेकर आये जहां उसकी भीषण दशा को देखने के बावजूद पुलिस ने मुकदमा लिखने के नाम पर टाल-मटोल कर उसे टरकाने की कोशिश की। उधर चोटों के कारण उसकी हालत बिगड़ रही थी। जिसकी वजह से परिजनों ने पहले उसे जिला अस्पताल में दाखिल किया जहां से उसको रेफर कर दिया गया। इसके बाद उसे परिजन झांसी में आर्मी हाॅस्पिटल लेकर गये। जहां उसको तुरंत आईसीयू में पहुंचाया गया। 2 दिसंबर तक उसका आर्मी हाॅस्पिटल में इलाज चलता रहा। वह लौटकर आया तो पता चला कि पुलिस ने न तो अभी तक मुकदमा लिखा है और न ही आरोपियों पर कोई कार्रवाई की है। जिसकी वजह से रामऔतार यादव उसे फिर जान से मारने की धमकी देता हुआ घूम रहा है। आज उसने पुलिस अधीक्षक को अपनी हालत दिखाते हुए इस अन्याय की जानकारी दी तो पुलिस अधीक्षक ने सीओ सिटी को जांच के आदेश कर दिये हैं।






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