12065564_1515048802143994_20145587447710710_nजालौन-उरई। बिना कागजों के सड़क पर फर्राटा भर रही दो बसों को एआरटीओ प्रवर्तन ने पकड़ लिया और उन्हें सीज कर दिया।
वैसे तो परिवहन विभाग की असीम अनुकंपा से मध्य प्रदेश से लगी सीमा में खासतौर पर और जिले की लगभग सभी सड़कों पर बिना परमिट की बसें दौड़ना आम बात है। लेकिन आज परिवहन विभाग की जान अंतिम चरण के ग्राम पंचायत चुनाव के कारण सांसत में थी। पोलिंग पार्टियों को रवाना करने के लिए जितनी बसों की जरूरत है। विभाग उतनी बसें जुटाने में असमर्थ रहा। जिसकी बौखलाहट में आज एआरटीओ प्रवर्तन मोह-माया छोड़कर सड़क पर उतर पड़े।
उन्होंने सबसे पहले एमपी 17 केबी 8855 को पकड़ा। मोहल्ला भवानी राम निवासी हरीकृष्ण इस बस को चला रहा था। जिसके पास न तो बस के कागज थे और न ही खुद का ड्राइविंग लाइसंेस। एआरटीओ प्रवर्तन ने इस बस को अपने कब्जे में कर सींज कर दिया। यही हाल बस नं. यूपी 92 टी 7468 को टोकने पर हुआ। कस्बे के ही निवासी संतोष कुमार इसे चला रहे थे। उनके पास भी बस के कागज नही थे। एआरटीओ ने इस बस को भी सींज कर दिया है।
पवित्र गाय समझकर संकट में भी बख्शी गई टूरिस्ट परमिट की बसें
परिवहन विभाग पर्याप्त बसों की व्यवस्था न होने से जहां चुनाव आयोग के दबाव की वजह से जबर्दस्त मुसीबत में था। वहीं उसके अनुग्रह भाव का आज फिर एक न्यौछावर हो जाने लायक उदाहरण देखने को मिला जब कानपुर से इंदौर के लिए टूरिस्ट परमिट पर चलने वाली लग्जरी बसें एआरटीओ प्रवर्तन ने आज के दिन भी नही छुई। यह बसें परिवहन विभाग के कायदे कानूनों की धज्जियां उड़ाते हुए एनएच के हर स्टाॅपेज पर सवारियां उतारते, चढ़ाते निकलती हैं। लेकिन इनसे इतना ज्यादा महीना विभाग से लेकर पुलिस तक को मिलता है कि इनको विभाग ने पवित्र गाय का दर्जा दे रखा है। जिसके कारण इनके मालिकों की आत्मा को तकलीफ पहुंचाना एआरटीओ प्रवर्तन को अपनी कितनी भी मुसीबत में गंवारा नही है। हालांकि पोलिंग पार्टियों में शामिल कर्मचारी पूरी बसे न मिलने की बात सुनकर ऊपर वाले से यही मना रहे थे कि विभाग लग्जरी टूरिस्ट बसें पकड़कर उनके हवाले कर दे तो ड्यूटी की परेशानी में उन्हें कुछ राहत महसूस हो सके।

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