09orai02कोंच-उरई। नगर के प्राचीन श्री सीतानाथ मंदिर पर बुधवार से श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ हो गया है। भागवत कथा से पूर्व भव्य कलशयात्रा निकाली गई जिस पर जगह जगह पुष्प वर्षा हुई।
कलशयात्रा का प्रारंभ श्री मुरली मनोहर मंदिर से हुआ। राजमार्ग से होकर कलशयात्रा भागवत कथा स्थल श्री सीतानाथ मंदिर पहुंची जहां वैदिक रीति से पूजन अर्चन किया। परीक्षित श्रीमती संतोषी सोनी भागवत महापुराण को अपने शीश पर धारण करके कलशयात्रा में चल रहीं थीं। कथावाचक व्यास पं. नवनीत मिश्रा शास्त्री ने भगावत कथा का महात्म्य बताते हुये कहा कि श्रीमदभागवत पुराण का सभी पुराणों में सर्वश्रेष्ठ स्थान है। इसमें अट्ठारह हजार श्लोक और बारह स्कंद हैं। उन्हेंने बताया कि भागवत कथा श्रवण से जीव को भक्ति, ज्ञान और वैराग्य की प्राप्ति होती है। उन्होंने कहा कि जो पुण्य भगवान के दर्शन से प्राप्त होता है वही पुण्य भागवत पुराण के दर्शनों से प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि कलिकाल में जो भी प्राणी श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करता है उसके समस्त क्लेशों का शमन स्वयमेव ही हो जाता है। उन्होंने तो भागवत पुराण को भगवान वासुदेव का साक्षात् श्रीविग्रह निरूपित करते हुये कहा कि इस पुराण में स्वयं भगवान वासुदेव समाविष्ट हैं और जो भी कथा श्रवण करता है उसे भगवान कृष्ण का साक्षात् दर्शन होता है। इस दौरान राहुल तिवारी, जयगोविंद मिश्रा, मनोज गुप्ता, महेश विदुआ, संदीप शांडिल्य, लल्लूराम मिश्रा, अवधेश द्विवेदी, कृष्णा यादव, गोविंदशरण, रघुवीर अग्रवाल, जयप्रकाश, डॉ. पंचम, विनीत मिश्रा, रज्जन गोस्वामी, रमेश पाटकार, प्रदीप रावत, प्रेमलता, सुमन, मीरा, गीता, मालती मिश्रा, पूनम, कुसुम सोनी, भगवती सोनी, शशि पाठक, उमा, विनीता, रजनी, किशोरी, गीता सोनी सहित तमाम लोग कलशयात्रा में शामिल रहे।

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