12065564_1515048802143994_20145587447710710_nउरई। विश्व मानवाधिकार दिवस पर बृहस्पतिवार को स्थानीय भगत सिंह साइंस काॅलेज में एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें अपने अध्यक्षीय संबोधन में काॅ. सुधीर अवस्थी ने मानवाधिकारों के महत्व पर प्रकाश डाला।
भारतीय जन नाट्य संघ (इप्टा) के तत्वावधान में आयोजित गोष्ठी में बोलते हुए देवेंद्र शुक्ला ने कहा कि मानवाधिकार मानव सभ्यता के विकास का सर्वोच्च सोपान है। जिसे मानवीय संवेदना की गहराई से आंका जा सकता है। उन्होंने साहित्य, संगीत और कला को मानवाधिकारों का स्रोत बताया।
इसी क्रम में डाॅ. कुमारेंद्र सिंह ने बताया कि अधिकार और कर्तव्य एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। अपने कर्तव्य को भुलाकर आप मानवाधिकार के दावेदार नही बन सकते। गोष्ठी में बोलते हुए समाजसेवी सुभाष चंद्रा ने कहा कि मानवाधिकार ही एक ऐसा अधिकार है जिसे समूची मानवता को सुरक्षा भी गारंटी दी जा सकती है। हमें अपने आसपास मानवाधिकारों के संरक्षण के लिए जागरूक बनना होगा।
विद्यालय की छात्रा शिल्पी नायक ने कहा कि मानवाधिकारों के साथ-साथ हमें महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष करना होगा। भारत में महिलाओं को मानवाधिकारों से वंचित रखा गया है। गोष्ठी में सत्येंद्र त्रिपाठी, डीपी सिंह, राजेंद्र सिंह, सुप्रिया दीक्षित, सूर्या शुक्ला, राजवीर सिंह आदि प्रवक्तागण मौजूद रहे।
इस अवसर पर सैकड़ों छात्र-छात्राएं जिसमें फुरकान अंसारी, शहबाज खान, भारत सिंह, वरुण शुक्ला, हिमांशु, उदय, शाश्वत त्रिपाठी, रजत खरे, पूनम, सरिता, बब्ली, दीक्षा, रोहिना, शिवांगी सिंह, नेहा, भारती, अंजली, प्रतीक्षा, मानसी, अनामिका उपस्थित रहे। संचालन इप्टा सचिव राज पप्पन ने किया।

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