14orai03कोंच-उरई। यहां श्री सीतानाथ मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में व्यासपीठ से कथा सुनाते हुये कथा प्रवक्ता पं. नवनीत मिश्र शास्त्री सत्संग के महात्म्य को बताते हुये कहते हैं कि सत्संग के बिना हरिकथा सुनने का सौभाग्य नहीं प्राप्त हो सकता क्योंकि भगवान में दृढ प्रेम सत्संग से ही उपजता है, विश्वास होने पर श्रद्धा उत्पन्न होती है तथा विश्वास और श्रद्धा से अंतःकरण शुद्ध होता है।
मंदिर के पुजारी पं. जयगोविंद मिश्रा के संरक्षकत्व में संयोजित श्रीमद्भागवत ज्ञान यज्ञ में कथा प्रवाह को आगे बढाते हुये कथा व्यास कहते हैं कि श्रीमद्भागवत सभी मतभेदों का शमन कर समन्वय पैदा करने वाला महान ग्रंथ है, भागवत कथा श्रवण मात्र से ही पापियों के पापों का नाश हो जाता है और उसे सद्गति की प्राप्ति होती है। धुंधकारी को तो प्रेतयोनि से मुक्ति भागवत कथा सुनने से ही मिल गई थी। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार जीव के लिये भगवत शरणागति आवश्यक है उसी प्रकार भागवत की शरण में आना भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि भगवान व्यासजी को भी इसी ग्रंथ की रचना करने के बाद शांति प्राप्त हो सकी थी। उन्होंने परमात्मा के प्रेम भाव को पारिभाषित करते हुये कहा कि जो व्यक्ति जिस रूप में भगवान का स्मरण करता है उसे उसी रूप में भगवान का सामीप्य प्राप्त होता है। कथा व्यास बताते हैं कि सर्वप्रथम भागवत कथा भगवान बिष्णु ने ब्यालीस श्लोकों में ब्रह्मा को सुनाई, ब्रह्मा ने नारद को और नारद ने वेदव्यास को, व्यासजी ने अट्ठारह हजार श्लोकों में इस ग्रंथ की रचना की और अपने पुत्र शुकदेवजी को पढाई। आज की कथा में कथाव्यास शास्त्री ने भगवान द्वारिकाधीश के विवाहों की बड़ी ही रोचक और आनंददायी कथायें सुना कर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। उन्होंने रूक्मिणी हरण की कथा काफी विस्तार से सुनाते हुये कहा कि रूक्मिणी का विवाह उनकी इच्छा के विपरीत होने वाला था लेकिन मन ही मन रूक्मिणी द्वारिकाधीश को अपना पति मान चुकी थीं। विवाह की तैयारियों के बीच रूक्मिणी ने द्वारिकाधीश को अपने मन का संकल्प बताते हुये संदेश भेजा और द्वारिकाधीश ने रूक्मिणी का हरण कर उनके साथ विवाह किया। भगवान द्वारिकाधीश ने सत्यभामा, कालिंद्री, जाम्बबंती आदि से भी विवाह रचाये, इस प्रकार उन्होंने सोलह हजार एक सौ आठ विवाह किये। यही कथा समय आने पर शुकदेवजी ने राजा परीक्षित को सप्ताह यज्ञ के रूप में सुनाई। परीक्षित श्रीमती संतोषी सोनी भागवत महापुराण की आरती उतारी और प्रसाद वितरित किया गया।

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