उरई। अन्ना जानवरों के आतंक से परेशान किसानों का गुस्सा चरम सीमा पार कर रहा है। आज बड़ागांव और कैथेरी के किसान लगभग 100 अन्ना जानवर पकड़कर डीएम के बंगले पर पहुंच गये जिससे खलबली मच गई। आनन-फानन में बंगले के गेट बंद कर जानवरों को भीतर घुसने से रोका गया।
इसके बाद किसान अन्ना गायें लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे और सारी गायें उन्होंने कलेक्ट्रेट परिसर में छोड़ दीं जिससे अफरा-तफरी मच गई। बताया जाता है कि खरीफ की फसल से हाथ धोने के बाद किसान अपना सबकुछ रबी पर दांव लगाये हुए हैं। लेकिन खेतों में हरियाली की चादर चढ़ते ही अन्ना जानवर समस्या ने सिर उठा लिया है। झुंड के झुंड गायें गांवों में विचरण कर रही हैं जो पलक झपकते ही कई बीघा खेत चरने में देर नहीं लगातीं। प्रशासन इन पर रोक के नाम पर विज्ञप्तियां जारी करने और बैठकों में खोखली चेतावनियां देने के अलावा कुछ नही कर पा रहा। जिससे किसान चरम सीमा तक उद्वेलित हो गये हैं।
उधर कुछ लोगों का यह भी कहना है कि गाय और गंगा पर आधारित भारतीय संस्कृति की रक्षा के लिए गाल बजाने वाले धर्माचार्य मंदिर मठों में धर्म की रक्षा के लिए कई एकड़ जमीन लगाये जाने के बावजूद गौशाला खोलने जैसी पहल क्यों नही कर रहे। जबकि गौ-वध रोकने और अन्ना पशु प्रथा से किसानों को बचाने के लिए यह समय उनके कर्तव्य की परीक्षा की महत्वपूर्ण घड़ी है।






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