12065564_1515048802143994_20145587447710710_nउरई। जिला पंचायत अध्यक्ष के लिए उम्मीदवार की घोषणा के बाद सपा में खलबली मची हुई है। विपक्षी खेमा सत्तारूढ़ पार्टी के अंदर संभावित बगावत पर टकटकी लगाये हुए है। जिसके हिसाब से उसकी रणनीति तय होगी।
समाजवादी पार्टी ने सोमवार को प्रदेश में जिला पंचायतों के अध्यक्ष पद के लिए 61 जिलों में अपने उम्मीदवारों के नाम का एलान कर दिया। जालौन जिले में पार्टी ने बबीना जिला पंचायत क्षेत्र की सदस्य फरहा नाज को उम्मीदवार बनाया है। पार्टी हाईकमान ने पहले उम्मीदवारी तय करने के लिए जो पैमाने तय किये थे उनके मुताबिक पार्टी के प्रति अभ्यर्थियों की निष्ठा कितनी पुरानी है यह भी एक बिंदु था। इस हिसाब से फरहा नाज को प्रत्याशी बनाना अपवाद ही कहा जायेगा। क्योकि पार्टी में उनकी इंट्री को पुराना नही कहा जा सकता। पर यह पहले से ही आभास मिलने लगा था कि पार्टी हाईकमान के वरदहस्त के कारण पूर्व सांसद घनश्याम अनुरागी इस मामले में किंग मेकर की भूमिका अदा करेगें। कुछ ही दिन पहले नई दिल्ली में सपा सुप्रीमों मुलायम सिंह और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से उनकी फरहा नाज के परिजनों के साथ घनिष्ट मुलाकात के फोटो सोशल मीडिया पर वायरल होने के साथ ही यह धारणा और पुख्ता हो गई थी। इसलिए नम्रता तिवारी दीक्षित, इच्छाराजे, संध्या यादव और फरहा नाज के बीच सपा की प्रत्याशिता के लिए चली होड़ में फरहा नाज बाजी जीतने में सफल रहीं। लेकिन अभी उन्हें और इम्तिहान पार करना बाकी है।
समाजवादी पार्टी के अंदरूनी सूत्र आशंका जता रहे है कि पार्टी के एक दिग्गज नेता उक्त फैसले के खिलाफ बगावत करके विपक्षी खेमे से अपनी पत्नी की उम्मीदवारी घोषित कर सकते हैं। सूत्रों का तो यहां तक कहना है कि बसपा और भाजपा दोनों ही बगावत की स्थिति में उन्हें समर्थन देने का भरोसा दिला चुकीं हैं। इसे देखते हुए शायद फरहा नाज के निर्विरोध अध्यक्ष बनने की राह में रोड़े अटक जायें।
भारी भरकम खर्च करके जिला पंचायत के लिए चुने गये सदस्यों की भी यही कामना है कि चुनाव जरूर हो ताकि उन्हें अपना खर्च मय ब्याज के वसूल करने का मौका मिल सके। गत् चुनाव उनके लिए इस मामले में काफी फलदायी सिद्ध हुआ था और इस बार भी वे लाखों की कीमत पाने की उम्मीदें संजोये हुए थे। लेकिन जिला पंचायत के सदन के समीकरण चुनाव परिणाम आने के बाद ऐसे बने कि उन्हें कोई घास डालता नजर नही आया। इससे सदस्य काफी खिन्न और विचलित हैं। लेकिन फरहा नाज की उम्मीदवारी और सपा की बगावत से उनके खिलाफ मजबूत प्रतिद्वंदी उतरने के बने आसार ने उनकी उम्मीदें फिर जवान कर दी हैं।

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