0 श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन कही सुदामा चरित्र की कथा
कोंच-उरई। यहां श्री सीतानाथ मंदिर में भक्ति और आनंद की हो रही बरसात में श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह के अंतिम दिवस भक्त श्रोता विभोर होकर नाचने लगते हैं। पं. नवनीत मिश्र शास्त्री ने भगवान द्वारिकाधीश के विवाहों की आनंददायी कथायें सुना कर जहां श्रोता समुदाय को आनंदित किया वहीं सुदामा चरित्र की कथा में उन्होंने श्रोताओं को इतना भावुक कर दिया कि उनके नेत्रकोर गीले हो गये।
मंदिर के मुख्य पुजारी पं. जयगोविंद मिश्रा द्वारा संयोजित श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह के दौरान आज अंतिम दिवस की कथा में कथा प्रवक्ता पं. नवनीत मिश्र शास्त्री ने भगवान द्वारिकाधीश के विवाहों की बड़ी ही रोचक और आनंददायी कथायें सुना कर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। उन्होंने रूक्मिणी हरण की कथा काफी विस्तार से सुनाते हुये कहा कि रूक्मिणी का विवाह उनकी इच्छा के विपरीत होने बाला था लेकिन मन ही मन रूक्मिणी द्वारिकाधीश को अपना पति मान चुकी थीं। विवाह की तैयारियों के बीच रूक्मिणी ने द्वारिकाधीश को अपने मन का संकल्प बताते हुये संदेश भेजा और द्वारिकाधीश ने रूक्मिणी का हरण कर उनके साथ विवाह किया। भगवान द्वारिकाधीश ने सत्यभामा, कालिंद्री, जाम्बबंती आदि से भी विवाह रचाये, इस प्रकार उन्होंने सोलह हजार एक सौ आठ विवाह किये। उन्होंने सुदामा चरित्र का मार्मिक चित्रण कर श्रोताओं को भावुक कर दिया, कहा कि भगवान द्वारिकाधीश और सुदामा की मित्रता हमें निश्छल मैत्री संबंधों के साथ आदर्श मित्रधर्म की भी शिक्षा देती है। इसके साथ ही एक और भी सीख मिलती है कि दूसरों का हिस्सा हड़पने वाले को भोगना पड़ता है। अंत में परीक्षित श्रीमती संतोषी सोनी भागवत महापुराण की आरती उतारी और प्रसाद वितरित किया गया।






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