18orai06उरई। राष्ट्रीय सेवा योजना के शिविर में छात्र-छात्राओं को पर्यावरण और आपदा प्रबंधन के बारे में जागरूक किया गया। उनसे कहा गया कि पुरानी परंपराओं का निर्वाह करके पर्यावरण सुरक्षा में कारगर योगदान किया जा सकता है।
दयानंद वैदिक महाविद्यालय की चारों इकाईयों का एक दिवसीय शिविर उक्त एजेंडे के तहत आयोजित किया गया। एनएसएस कक्ष के पास सुबह स्वयं सेवक एकत्रित हुए। इस अवसर पर हुई गोष्ठी में वनस्पति विज्ञान के प्रवक्ता विजय कुमार यादव ने कहा कि तालाब, नदी, जंगल आदि संरचनाओं के संरक्षण की तमाम सारी परंपरायें हमारी संस्कृति में मौजूद हैं जिनका अनुशीलन करके हम पर्यावरण संरक्षण में अहम योगदान कर सकते हैं। दूसरी ओर उन्होंने कुछ कुरीतियों की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि मछलियों को आटा खिलाने की परंपरा हमारी नादानी की निशानी है जिससे परहेज किया जाना चाहिए।
गोष्ठी को संबोधित करते हुए पूर्व प्राचार्य डाॅ. आरके श्रीवास्तव ने कहा कि खनन से पर्यावरण पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। क्रेशर उद्योग के लिए पहाड़ों को काटे जाने की वजह से अति वर्षा व अल्प वर्षा जैसी समस्याओं से समाज प्रतिवर्ष दो-चार होने को मजबूर है। उन्होंने कहा कि बढ़ती ग्लोबल वार्मिंग पर गौर न किया गया और सभी ग्लेशियर पिघल गये तो सारी पृथ्वी जलमग्न हो जायेगी और जीवन को कोई बचा नही पायेगा।
संगोष्ठी के बाद स्वयं सेवक अपने-अपने कार्यक्रम अधिकारियों के साथ मलिन बस्तियों में जागरूकता के लिए पहुंचे जहां उन्होंने विशेष रूप से जल प्रबंधन की तकनीक के बारे में लोगों को बताया। कार्यक्रम अधिकारी डाॅ. राजेश पालीवाल, डाॅ. गिरीश श्रीवास्तव, डाॅ. मलखान सिंह ने छात्र-छात्राओं को कई नई जानकारियां दीं।

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