0 गणपति स्टील में करंट से मजदूर की मौत
0 अस्पताल में लावारिस भर्ती करा दिया था प्रबंधन ने
उरई। स्टील फैक्ट्री में काम कर रहे मजदूर को करंट लगने के बाद लावारिस हालत में अस्पताल में भर्ती कराकर प्रबंधन ने पल्ला झाड़ लिया बाद में उसकी मौत हो गई। घटना की जानकारी होने पर मृतक के गांव से परिजन और सैंकड़ों लोग आ गये। जिन्होंने शव रखकर अंबेडकर चैराहे पर जाम लगा दिया। लगभग 2 घंटे तक जाम चलने के बाद बसपा के पूर्व सांसद बृजलाल खाबरी द्वारा प्रदर्शनकारियों से चेतावनी के तेवर में बात किये जाने पर यातायात बहाल हो पाया।
फैक्ट्री एरिया स्थित गणपत स्टील प्लांट में बनफरा का राजा भइया (25वर्ष) मजदूरी करता था। श्निवार को वह फैक्ट्री में काम कर रहा था। इसी दौरान उसे करंट लग गया। यह देख प्रबंधन के हाथ-पैर फूल गये। आनन-फानन में प्रबंधन ने दूसरे मजदूरों की सहायता से उसे जिला अस्पताल पहुंचवाकर लावारिस हालत में भर्ती करा दिया गया। किसी पैरोकार या घर के लोगों के न होने की वजह से उसके इलाज में चिकित्सकों ने गंभीरता नही दिखाई जिसके कारण थोड़ी देर में ही उसने दम तोड़ दिया। इसी बीच जिला अस्पताल से सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंच गई और लावारिस स्थिति में ही पंचनामा कर शव को सील करने की तैयारी करने लगी। तब तक किसी परचित की निगाह राजा भइया के शव पर चली गई और उसने तत्काल मोबाइल से बनफरा में उसके परिजनों को यह सूचना दे दी। आक्रोशित परिजन और सैंकड़ों ग्रामीण इसके बाद अस्पताल आ पहुंचे और उन्होंने शव को पुलिस के कब्जे से छीनकर अंबेडकर चैराहें पर रख दिया और जाम लगा दिया।
उक्त स्थान शहर का हृदय स्थल होने की वजह से जाम के कारण पूरे शहर में यातायात व्यवस्था अस्त-व्यस्त हो गई। खबर पाकर अपर पुलिस अधीक्षक शकील अहमद, एसडीएम सदर डाॅ. एवी सिंह और सीओ सिटी डाॅ. जंगबहादुर सिंह मौके पर पहुंच गये। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को समझा-बुझाकर जाम खुलवाने का प्रयास किया। किंतु प्रदर्शनकारी फैक्ट्री मालिक को बुलाकर तत्काल 10 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग पर अड़े हुए थे। इसी बीच बसपा के पूर्व सांसद बृजलाल खाबरी फैक्ट्री प्रबंधन की ओर से मौके पर पहुंचे और उन्होंने प्रदर्शनकारियों से दो टूक कहा कि उनकी बात मानकर जाम हटा लो तो मुआवजा दिलवा दूंगा वरना कुछ नही मिलेगा। बृजलाल खाबरी के तेवर देखकर आखिर में प्रदर्शनकारियों ने जाम खोल दिया। हालांकि अभी भी तनाव पूरी तरह खत्म नही हुआ है।
प्रबंधन की ओर से पेशकश
उधर फैक्ट्री मालिक की ओर से उनके एक नजदीकी रिश्तेदार मृतक के परिजनों से पांच लाख रुपये मुआवजे का आॅफर लेकर मिले। उन्होंने बाद में स्टांप पर इसका लिखित वायदा करके परिजनों को सौंप दिया है।
परिवार हुआ अनाथ
मृतक मजदूर राजभइया अपने पीछे पत्नी रेशमा (22वर्ष), पुत्र ऋषभ (3वर्ष) और पुत्री शालू (2वर्ष) छोड़ गया है। आर्थिक स्थिति जर्जर होने और आय का कोई जरिया न होने के कारण उसके न रह जाने से पूरे परिवार की हालत अनाथ जैसी हो गई है।






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