उरई। मातृ एवं बाल स्वास्थ्य की जागरूकता के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन रेडियों का सहारा लेगा। 26 दिसंबर से हर बुधवार इस पर आधारित सुनहरे सपने, संवरती राहें कार्यक्रम का प्रसारण किया जायेगा। 26 कड़ियों का यह प्रसारण 26 सप्ताह में पूरा होगा।
जच्चा-बच्चा मृत्यु का खतरा अभी तक पूरी तरह समाप्त नही हुआ है। साथ ही जच्चा-बच्चा को हिदायतों का पालन न करने की वजह से बहुतायत में बीमारियों का दंश झेलना पड़ता है। सरकार की सोच है कि इस मामले में जागरूकता ही सबसे बड़ा उपचार है। तांकि गर्भ और प्रसव के समय अपेक्षित सावधानियों में लापरवाही से लोग बाज आयें। साथ ही समय पर प्रतिरक्षण उपायों से जच्चा-बच्चा को गंभीर बीमारियों से भी बचाया जा सके। ग्रामीण क्षेत्रों में जहां देश की ज्यादातर आबादी रहती है जनसंचार के सबसे बड़े साधन के रूप में रेडियों की उपयोगिता के आगें इस मकसद के लिए नतमस्तक होते हुए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत उक्त योजना बनाई गई।
जिले में उक्त योजना के लिए पांच अग्रदूत आशा कार्यकत्रियां चुनी गई हैं। जिनमें अनुराधा कुठौंद, भारती माधौगढ़, गायत्री जालौन, आशा देवी नदीगांव व अरुणा दोहरे कोंच शामिल हैं को योजना के तहत एक-एक रेडियों और पांच-पांच सौ रुपये नगद मुख्य चिकित्साधिकारी डाॅ. आशाराम गौतम द्वारा प्रदान किये गये। मुख्य चिकित्साधिकारी ने बताया कि उक्त कार्यकत्रियां सुनहरे सपने संवरती राहें कार्यक्रम की हर कड़ी सुनेंगी और प्रत्येक कड़ी में पूंछे गये सवालों का बाद में जबाव भेजेंगी। प्रदेश स्तर पर सर्वश्रेष्ठ सवाल भेजने वाली आशा बहुओं को उत्साहवर्धन के लिए पुरस्कृत किया जायेगा।
गत्वर्ष सवालों का सही जबाव देने में प्रदेश स्तर पर चयनित जिले की दो आशा बहुओं बबली कदौरा और श्वेता रामपुरा को आज एक-एक प्रेशर कुकर से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संचालन नोडल अधिकारी धमेंद्र ने किया। एनआरएचएम के जिला कार्यक्रम प्रबंधक डाॅ. प्रेम प्रताप सिंह भी इस अवसर पर उपस्थित थे।






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