
सरकारी गोदाम में कैसे अनलोड हुई बेनामी चाय
क्या गैर प्रांत से गायब कर यहां उतारी गई चाय
कोंच-उरई। नदीगांव पुलिस को मिली बड़ी सफलता, उसने नदीगांव की गल्ला मंडी में छापा डाल कर वहां छिपा कर रखी गई बेनामी चाय का बड़ा जखीरा बरामद किया है। बरामद चाय की कीमत तकरीबन सत्तर लाख के आसपास आंकी गई है। समझा जा रहा है कि किसी गैर प्रांत से गायब कर किसी ट्रक द्वारा यहां चाय का जखीरा अनलोड किया गया था। हैरान करने बाली बात यह है कि मंडी के जिस गोदाम से यह चाय का बंपर स्टॉक बरामद किया गया है वह गोदाम सरकार के अधीन ही है, यानी किसी व्यापारी के नाम उक्त गोदाम अलॉट नहीं है। देखा जाये तो यह बहुत ही बड़ी बात है और चल रहे सिस्टम की पोल खोलने के लिये काफी है।
मिली जानकारी के मुताबिक नदीगांव पुलिस को इस आशय की गोपनीय सूचना मिली कि वहां की गल्ला मंडी के एक गोदाम में बेनामी चाय का बड़ा जखीरा छिपा कर रखा गया है। एसओ ने सूचना को काफी गंभीरता से लेकर फोर्स के साथ मंडी के उक्त में छापा मारा तो उनकी भी आंखें फटी रह गईं, गोदाम में विभिन्न ब्रांडों की सैकड़ों बैग्स चाय के वहां छिपा कर रखे गये थे। जब उन बैग्स की गिनती कराई गई तो उनकी संख्या साढे पांच सौ निकली, यानी लगभग डेढ टन चाय वहां बरामद हुई जिसकी बाजारू कीमत लगभग सत्तर लाख के आसपास बताई गई। पुलिस ने आवश्यक लिखापढी करने के बाद उक्त चाय का जखीरा वहां से हटवा कर थाने में दाखिल करा दिया है। इस बरामदगी की सूचना विभागीय उच्चाधिकारियों समेत एसडीएम कोंच को भी दी गई है। एसडीएम ने बताया है, हां, उन्हें पुलिस द्वारा ऐसी जानकारी दी गई है। चाय कैसे और किसके द्वारा वहां लाकर छिपाई गई, इसका पता लगाया जा रहा है। यदि कोई क्लेम करने बाला नहीं मिला तो इसकी नीलामी करवा कर पैसा सरकारी खजाने में जमा करा दिया जायेगा।
लगाये जा रहे हैं नाना प्रकार के कयास
कोंच-उरई। नदीगांव में बरामद चाय के बड़े जखीरे को लेकर इलाके में तरह तरह की चर्चायें जोर पकड़ रहीं हैं। चर्चाओं के अनुसार चाय की यह बड़ी खेप किसी गैर प्रांत से लद कर कहीं जा रही होगी और रास्ते में इसे गायब कर दिया गया होगा। बरामद माल में किसी एक ब्रांड की चाय न होकर तारी एग्रो, संतोष जैसे कई ब्रांड मिक्सअप हैं। बड़ा सवाल यह है कि क्या इस पूरे मामले के तार किन्हीं सफेदपोशों से तो नहीं जुड़े हैं क्योंकि किसी ऐरे गैरे की औकात सरकारी गोदाम में चाय का गलत तरीके से भंडारण नहीं हो सकती है। इधर, जब मंडी सचिव डॉ. दिलीपकुमार वर्मा जो नदीगांव गल्ला मंडी के भी प्रभारी हैं, से इस बाबत पूछा गया तो उन्होंने भी स्वीकारा कि चूंकि वहां कारोबार बंद है सो उक्त गोदाम सरकारी कब्जे में ही है, अलबत्ता वहां पीआरडी जवानों को मंडी की संपत्तियों की रखवाली करने के लिये लगाया गया है इसलिये उनसे पूछना पड़ेगा कि चाय उक्त गोदाम में कैसे उतरी। बहरहाल, यह बड़ा मामला इस लिये बन जाता है कि चोरों की हिम्मत सरकारी गोदाम का उपयोग चोरी का माल छिपाने के लिये पड़ गई और इसका जबाब निश्चित रूप से संबंधित अधिकारियों को देना ही होगा। नदीगांव थाना क्षेत्र में इस तरह की चाय पकड़े जाने का यह दूसरा मामला है।







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