
जालौन-उरई। नंद घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की के उद्घोष के साथ श्रीकृष्ण जन्म, कृष्ण-लीला तथा गिरिराज पूजन की कथा सुनकर भक्त झूम उठे। नगर की पुरानी गल्ला मंडी में स्थित लक्ष्मी नारायण मंदिर में चल रही साप्ताहिक श्रीमद्भगवद् ज्ञान यज्ञ के चैथे दिन पंजाब प्रात के अमृतसर से पधारी सुश्री निष्कम्प चेतना गिरी जी ने अपनी दिव्य और सरस वाणी से इस अमृत कथा में चार चांद लगा दिये।
नगर की पुरानी गल्ला मंडी में स्थित लक्ष्मी नारायण मंदिर में आयोजित सप्ताहिक श्रीमद्भगवद् ज्ञान यज्ञ के चैथे दिन पंजाब प्रात के अमृतसर से प्रधारी सुश्री निस्कम्प चेतना गिरी जी ने उपस्थित श्रोताओं को श्रीकृष्ण-जन्म तथा कृष्ण-लीला का विस्तृत वर्णन किया गया। जिसमें श्रीकृष्ण का मथुरा की जेल में प्राकट्य होने के बाद वासुदेव द्वारा श्रीकृष्ण को गोकुल में नंद बाबा के यहाँ पहुँचा देने पर जैसे ही सुबह सभी जागे तो लाला का जन्म होने से पूरा गोकुल खुशिया मनाने लगा। सभी ब्रजवासी नाचते-झूमते हुए -नन्द घर आनन्द भयो, जय कन्हैया लाल की- गाते हुए मस्त हो रहे थे। इसके बाद साध्वी जी के द्वारा क्रमवद्ध श्रीकृष्ण लीलाओं का वर्णन किया गया। जिसमें गिरिराज जी महाराज के पूजन की कथा का श्रवण कराया गया। इंद्र के नाराज होने पर श्रीकृष्ण ने पूरे गोकुल तथा सभी नर-नारियों को गिरिराज पर्वत के नीचे खड़ा कर उनकी जान की रक्षा की थी। इतना ही नहीं उन्होंने अपनी अंगुली पर गिरिराज पर्वत को उठाकर इंद्र का अभिमान चूर-चूर किया। सभी गोकुल वासियों से इंद्र की पूजा की बजाय गिरिराज जी महाराज की पूरा कराकर इंद्र का मान-मर्दन किया। इस दौरान बीच-बीच में संगीतमय भजनों की प्रस्तुति से बैठे श्रोतागण झूम कर भक्तिभाव से नृत्य करने लगते थे।







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