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जालौन-उरई। खेलों से खिलाडिय़ो का शारीरिक, मानसिक विकास होता है। वही शतरंज जैसे खेल से तो खिलाडिय़ो का शारीरिक विकास के साथ मानसिक विकास भी होता है। वही ऐसे आयोजन कराने से दिवगंत आत्माओं को याद कर उन्हे श्रद्वाजंली दी जा सकती है। उक्त बात दिवंगत अधिवक्ताओं की स्मृति में आयोजित लायंश क्लब की ओर से दो दिवसीय जनपदीय शतरंज प्रतियोगिता के शुभारम्भ के मौके पर उपजिलाधिकारी ने अधिवक्ताओं के समक्ष कही।
दिवगंत अधिवक्ताओं की स्मृति में आयोजित दो दिवसीय जनपदीय शतरंज प्रतियोगिता में उपजिलाधिकारी प्रेमचंद्र यादव ने बोलते हुए कहा कि खेलो से खिलाडिय़ो का शारीरिक विकास होता है। वही शतरंज जैसे खेल से तो खिलाडिय़ो का शारीरिक विकास के साथ मानसिक विकास भी होता है। वही ऐसे आयोजन कराने से दिवगंत आत्माओं को याद कर उन्हे श्रद्वाजंली दी जा सकती है। प्रतियोगिता में जनपद के करीब 15 शतरंज खिलाडियों ने भाग लिया इस मौके पर अधिवक्ता असरफ अली, योगेश तिवारी, कृष्णकांत तिवारी, उमेश दीक्षित, संतोष यादव, श्री गोविंद स्वणज़्कार, हेमंत श्रीवास्तव रामवीर सिंह, चंद्रशेखर विश्वकमाज़्, मुन्ना लाल, मनोज गुप्ता, रामलखन राठौर, शकील अहमद, गीतेश मिश्र सहित तमाम अधिवक्ता मौजूद रहें। कायज़्क्रम का संचालन वरिष्ठ अधिवक्ता संतोष यादव ने किया।

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