0 वरिष्ठ रंगकर्मी नरोत्तम स्वर्णकार बतौर निर्देशक समझा रहे हैं अभिनय की बारीकियां
cropped-12065564_1515048802143994_20145587447710710_n.jpgकोंच-उरई। झांसी में आज से शुरू हो रहे झांसी जन महोत्सव में कोंच की देश विख्यात रामलीला को भी एक लीला का मंचन करने का न्यौता दिया गया है। रामलीला संचालित करने वाली मातृसंस्था श्री धर्मादा रक्षिणी सभा ने इस न्यौते को स्वीकार करते हुये रामलीला के कलाकारों से मशविरा कर धनुष यज्ञ एवं लक्ष्मण-परशुराम संवाद लीला का मंचन करने पर सहमति जताई है।
1 दिसंबर को होने बाले इस मंचन को बेहतर ढंग से निभाने के लिए पिछले एक पखवाड़े से सभी रंगकर्मी हाड़तोड़ मेहनत करते हुये रिहर्सल करने में जुटे हैं। पिछले चार दशकों से कोंच की 165 वर्ष पुरानी रामलीला में अपना महत्वपूर्ण योगदान देते आ रहे वरिष्ठ रंगकर्मी नरोत्तमदास स्वर्णकार बतौर निर्देशक झांसी जा रहे कलाकारों को अभिनय की बारीकियां बता रहे हैं। उन्होंने बताया कि मंचित होने बाली लीला में वीर रस और करुणा रस का उम्दा घालमेल तो है ही, यह लीला हास्य विनोद से भी परिपूर्ण है, इसके अलावा जरूरत के मुताबिक इसमें गीतों का भी समावेश किया गया है। उन्होंने बताया कि चूंकि यह लीला कोंच में जब मंचित की जाती है तो इसमें कम से कम चार घंटे का समय लगता है, लेकिन झांसी के मुक्ताकाशी मंच पर इसे निर्धारित दो घंटे में पूरा करना है, सो दी गई समयसीमा में लीला पूरी करने के लिहाज से तैयारी करनी पड़ रही है।
रामलीला विशेषज्ञ रमेश तिवारी ने बताया है कि कोंच की ऐतिहासिक रामलीला में मर्यादाओं और वर्जनाओं का ध्यान रखना महत्वपूर्ण है और इसका मंचन करने बाले कलाकार पेशेवर न होकर यहां के आम स्थानीय जन हैं जो पूरे श्रद्धा भाव से रामकाज मान कर रामलीला को अपनी सेवाएं देते रहते हैं। इस लिहाज से देखा जाए तो कोंच की रामलीला के साथ स्थानीय लोगों का आत्मीय जुड़ाव है जिसके चलते यह जन सहयोग से पिछले साढे सोलह दशक से अनवरत मंचित होती आ रही है। रामलीला मंचन में अतुल शर्मा, वीरेंद्र त्रिपाठी, मुन्ना लाल पटैरया, अभिषेक रिछारिया पुन्नी, सूर्य दीप सोनी, मृदुल दांतरे, पवन परिहार, दीपू सोनी, ऋषि झा, सुमित झा, गौरीशंकर झा, राहुल राठौर, मिरकू महाराज सहित अन्य तमाम रंगकर्मी हिस्सा ले रहे हैं।

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