0 लड़कियों के मुताबिक वह स्वेच्छा से गईं थीं प्रदीप के साथ
0 घटना में नामजद अन्य तीन लोगों से घटना का दूर का भी वास्ता नहीं
0 बालिग और नाबालिग के बीच उलझा मामला, दारोमदार अब डॉक्टरी रिपोर्ट पर
27orai10कोंच-उरई। सर्किल के नदीगांव थाना क्षेत्र में चार लोगों द्वारा दो चचेरी बहनों को अगवा कर दुष्कर्म करने के मामले में नया मोड़ आ गया है। लड़कियों में से एक ने कबूला है कि उसके साथ गंदा काम हुआ है जबकि दूसरी ने उसके साथ ऐसी किसी भी घटना से इंकार किया है। इसके अलावा अन्य तीन लोगों को उन्होंने बेदाग बताया है। लड़कियों की इस स्वीकारोक्ति के बाद मामले में अब एक नया मोड़ आ गया है, लड़कियों की डॉक्टरी कराई गई है और मामला केवल उनके बालिग और नाबालिग होने में उलझा है, डॉक्टरी रिपोर्ट में अगर उनके बालिग होने का खुलासा होता है तो मामले में कोई केस बनता ही नहीं है, अलबत्ता अगर वे माइनर निकलीं जैसा कि उनके अभिभावक दावा कर रहे हैं, तो ही इसमें आपराधिक मुकदमा चलाया जा सकता है। एएसपी ने गांव पहुंच कर लड़कियों से बात की है, उन्हें बलात् अगवा किया गया था या वे अपनी मर्जी से गईं थीं, इसकी जांच की जा रही है।
तीन दिन पूर्व नदीगांव थाने के ग्राम परासनी में एक सनसनी फैलाने बाला मामला प्रकाश में आया था जिसके मुताबिक गांव की अनुसूचित विरादरी की दो चचेरी बहनों को चार लोगों द्वारा बलात् अगवा कर सामूहिक दुष्कर्म का आरोप लगाया गया था। मामले में प्रदीप यादव पुत्र मानसिंह, सुल्लन पुत्र महाराजसिंह, भूपसिंह पुत्र परशुराम तथा हेमंत पुत्र सुघरसिंह के खिलाफ थाना पुलिस ने पॉस्को एक्ट तथा अनुसूचित जाति जनजाति उत्पीडन निवारण अधिनियम के तहत मामला पंजीकृत किया है और जांच सीओ मनोजकुमार गुप्ता के हवाले की गई है। चूंकि मामला काफी बड़ा है सो जिले के अपर पुलिस अधीक्षक शकील अहमद रविवार को गांव परासनी गये और पीड़िताओं से बातचीत की जिसमें बताया गया कि केवल प्रदीप ने एक लड़की के साथ गंदा काम किया गया, दूसरी लड़की ने ऐसी किसी हरकत के अपने साथ होने से इंकार किया है। इसके साथ अन्य तीन लोगों का इस मामले से कोई वास्ता नहीं है। उनकी इस स्वीकारोक्ति के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है जिसमें बलात् अगवा करने की बात हालांकि बेदम दिखाई दे रही है, लेकिन एएसपी का कहना है कि इसकी जांच की जा रही है कि उन्हें अगवा किया गया था या वे अपनी मर्जी से गईं थीं। मामले में नामजद कराये गये तीन आरोपियों को भी गलत ढंग से फंसाया जाने की भी संभावनायें बलवती दिखाई दे रहीं हैं। अब पूरा मामला केवल लड़कियों के बालिग होने और नहीं होने के बीच पैंडुलम की भांति लटक गया है। एएसपी के मुताबिक देखने में तो लड़कियां बालिग प्रतीत होती हैं लेकिन उनके अभिभावकों का दावा है कि वे नाबालिग हैं, डॉक्टरी परीक्षण करा लिया गया है और सारा लब्बोलुआब डॉक्टरी रिपोर्ट पर है और 164 के बयान में लड़कियां क्या कहती हैं उसी आधार पर आगे की कार्यवाही होगी।

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