उरई। छोटी संसद के चुनाव से सामाजिक और राजनैतिक सत्ता को कमजोर तबके के हाथों में पहुंचाने की प्रक्रिया सुचारू रूप से अग्रसर हुई है। अब जिम्मेदारी इस वर्ग के नव निर्वाचित प्रधानों की है कि वे वंचितों के लिए प्रावधानित किये गये कानूनों का लाभ उन तक पहुंचना सुनिश्चित करें और कारगर विकास के जरिए अपनी क्षमताओं का लोहा पूरे समाज में मनवायें।
झांसी रोड स्थित रघुवीर धाम में बुंदेलखंड दलित अधिकार मंच व अन्य समान धर्मी जन संगठनों के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दलित, पिछड़े, अल्पसंख्यक व महिला प्रधानों के सम्मान समारोह को सम्मानित करते हुए बुंदेलखंड दलित अधिकार मंच के संयोजक कुलदीप बौद्ध ने कही। इस समारोह में जिले के 185 प्रधान सम्मानित किये गये। जिनमें सिमरा शेखपुर के दिनेश, कन्हरपुरा के सुरेश, उद्योतपुरा के संजय, कुकरगांव के संतोष कुमार, बरहल के बृजभूषण, तीतरा खलीलपुर के महेंद्र, भुआ के जगमोहन, मड़ोरा की कूड़ावाली, जगनेवा के रामपाल, गिगौरा के अभिषेक आदि शामिल हैं।
प्रगति सेवा संस्थान के संतोष गौतम ने कहा कि शोषित वर्ग के प्रधानों को प्रतिष्ठा के मामले में चुनौती कबूल करनी पड़ेगी। उन्हें सड़ीगली सामाजिक व्यवस्था में यह कहकर पद के अधिकार से वंचित रखा गया था कि वे योग्यता और उत्तरदायित्व की भावना से परे हैं। जिसकी वजह से उन्हें कोई जिम्मेदारी सौंपने से अनर्थ की आशंका रहती है। उन्होंने कहा कि ऐसी व्यवस्थाओं के निर्माताओं को हमारे प्रधान ईमानदारी और गुणवत्ता पूर्ण ढंग से गांव की व्यवस्था का संचालन करके मुंहतोड़ जबाब दें। महिला मंच की शीलिमा ने कहा कि महिला प्रधानों को परिषदीय स्कूलों के आदर्श संचालन और कुपोषण से ग्रस्त बच्चों की बेहतर परवरिश की चुनौती स्वीकार करके अपने होने की सार्थकता सिद्ध करनी चाहिए। कल्पना बौद्ध ने कहा कि कमजोर वर्ग के प्रधानों के लिए यह सुनहरा इतिहास लिखने का अवसर है। रेहाना मंसूरी ने कहा कि लोकतंत्र गरीब और पददलित जनता के फायदे की व्यवस्था है जिसकी वजह से इस वर्ग के जनप्रतिनिधियों को लोगों की सेवा के उत्कृष्ट प्रतिमान स्थापित करने पर ध्यान देना चाहिए ताकि लोकतंत्र में और निखार आ सके। कल्पना बौद्ध, अनीता, कमलेश, लक्ष्मी, रीता, राजेश्वरी, नंदकुमार मलथुआ, विमल, राजकुमार, रामेश्वर आदि ने भी विचार प्रकट किये।







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