0 साल बीतने के बाद भी सैकड़ों किसानों के खातों में नहीं पहुंची सरकारी इमदाद
30orai07कोंच-उरई। बैसे तो गुजरा बर्ष 2015 कोंच के लिये कई खट्टी मीठी यादों का साल रहा लेकिन सबसे ज्यादा भारी यह किसानों पर रहा। पिछले साल सूखा की मार झेल कर फारिग हुये किसानों को रवी की फसलों से काफी उम्मदें थीं लेकिन ऊपर वाले ने ऐसा कहर बरपाया कि किसान की रही सही कमर भी टूट गई। अतिवृष्टि और ओलावृष्टि ने तहसील क्षेत्र के किसानों की अस्सी से नब्बे फीसदों को तबाह कर दिया और बैंक तथा साहूकारों के कर्जों के तले दबे सैकड़ों किसानों ने दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से आत्महत्या का चुन डाला। किसानों की बदहाली यहीं खत्म नहीं हुई, सरकार ने किसानों को फसलों की बर्बादी के एवज में जो सरकारी इमदाद भेजी थी उसे पाने में भी किसानों को दांतों पसीना निकल आया। यहां तक कि तकरीबन छह सैकड़ा किसान अभी भी ऐसे हैं जिनके खातों में साल गुजरने के बाद भी इमदाद की रकम नहीं पहुंची है।
पिछले तीन सालों से किसानों पर प्रकृति की जबर्दस्त मार पड़ती आ रही है, कभी सूखा तो कभी अतिवृष्टि और ओलावृष्टि ने किसानों पर ऐसा कहर बरपाया है कि वह कहीं का नहीं रहा। गुजरे साल खरीफ की फसल सूखा में चट जाने के बाद किसानों को रवी की फसलों से काफी उम्मीदें थीं। पूंजी न होते हुये भी किसान ने बैंकों और साहूकारों से मोटे ब्याज पर कर्ज लेकर खेतों में खाद बीज पटका था। देखने में फसलें भी ऐसी लहलहा रहीं थीं मानों किसानों से कह रहीं हों कि उनके सारे दलुद्दर अब दूर समझो, लेकिन ऊपर वाले ने उसके सारे अरमानों पर पानी फेर दिया और जनवरी माह में ही अतिवृष्टि और ओलावृष्टि की ऐसी मार पड़ी कि किसान कराह कर रह गया। राजस्व विभाग द्वारा कराये गये सर्वे में भी साफ हो गया कि फसलें अस्सी से नब्बे फीसदी चट गईं थीं। सरकार ने भी माना कि नुकसान हुआ जिसके एवज में आर्थिक इमदाद भी मुहैया कराई गई। तहसील प्रशासन द्वारा दी गई जानकारी में बताया गया है कि 49 हजार 258 किसानों के खातों में 9 हजार के हिसाब से 28 करोड़ 12 लाख 19 हजार 026 दिया जा चुका है जबकि 6 हजार 295 किसानों को डबल राशि दी गई है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि लगभग 6 सौ किसान ऐसे शेष बचे हैं जिनके खातों में छोटी मोटी त्रुटि के कारण पैसा हस्तांतरित नहीं हो पाया है। यहां गौर तलब यह भी है कि गत वर्ष खरीफ सूखे का मुआवजा अभी भी आधे किसानों को नहीं मिल सका है। बहरहाल, किसान भगवान से प्रार्थना कर रहे हैं कम से कम अबकी दफा ऐसी कोई आसमानी आफत न आये बरना भुखमरी से कोई बचा नहीं सकेगा।

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