0 मुख्यमंत्री तक का लिहाज नहीं
cropped-12065564_1515048802143994_20145587447710710_n.jpgउरई। शिक्षा मित्र से बने सहायक शिक्षकों का शोषण उनके वेतन अदायगी में किया जा रहा है। शनिवार को कालपी स्थित ब्लाॅक संसाधन केंद्र में कई सहायक शिक्षकों ने खंड शिक्षाधिकारी की वसूली की मांग पर विरोध जताया और कहा कि वे एक धेला तक नहीं देंगे। उन्होंने कहा कि इसी वसूली की वजह से मुख्यमंत्री द्वारा तय डैडलाइन गुजर जाने के बावजूद आज तक किसी भी सहायक शिक्षक को वेतन का भुगतान नही हो पाया है।
प्राप्त समाचार के अनुसार यह स्थिति अकेले महेबा विकास खंड की नही है। बल्कि सभी विकास खंडों में अवैध उगाही का प्रयास हो रहा है। जिला बेसिक शिक्षाधिकारी राजेश वर्मा की शह पर खंड शिक्षाधिकारी बीआरसी से लेकर जिला कार्यालय तक के बाबू और लेखाधिकारी बेरहमी से वक्त के मारे इन सहायक शिक्षकों को दुहने में जुटे हैं। जबकि महीनों से मानदेय तक से वंचित होने के कारण फाकाकशी से गुजर रहे इनमें से तमाम शिक्षकों की हालत इतनी गई गुजरी है कि जल्लाद तक उनके सामने अपनी बेदर्दी भूलने को मजबूर हो सकता है। यह दूसरी बात है कि बेसिक शिक्षा विभाग ने जल्लाद और कसाइयों को भी पीछे छोड़ दिया है।

बीएसए से मिले तो वेतन काटा
महेबा विकास खंड के गुढ़ा खास में तैनात सहायक शिक्षक प्रवीण सिंह परिहार की स्थिति बेसिक शिक्षाधिकारी की मक्कारी का एक नमूना कही जा सकती है। वेतन बिल पर खंड शिक्षाधिकारी के हस्ताक्षर न हो पाने से परेशान सहायक शिक्षक परिहार अपनी वृद्ध मां को लेकर बेसिक शिक्षाधिकारी राजेश वर्मा से मिले तो अमानवीयता की हद करते हुए उन्होंने न केवल कोई बात नही सुनी बल्कि वृद्धा के साथ अभद्रता तक कर डाली। सहायक शिक्षक प्रवीण सिंह परिहार ने उन्हें यह बताने की कोशिश की कि वे आकस्मिक अवकाश मंजूर कराकर और कंट्रोल रूम व विद्यालय में उसकी इंट्री कराकर उनसे मिलने आये हैं। लेकिन बदले की भावना बीएसए पर इतनी बुरी सवार थी कि उन्होंने परिहार और उनकी मां को बुरी तरह झिड़कते हुए खंड शिक्षाधिकारी को अवकाश के बावजूद उनका एक दिन का वेतन काट देने का हिटलरी फरमान मोबाइल पर सुना दिया। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि बीएसए के इस व्यवहार से प्रवीण परिहार की मां के न केवल आंसू निकल पड़े बल्कि अगर दूसरे लोगों ने उन्हें संभाला न होता तो वे भावुकता में अन्यथा कदम उठाने जा रहीं थी।

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