cropped-12065564_1515048802143994_20145587447710710_n.jpgउरई। सूखे के कारण किसानों की बदहाली देखकर भले ही मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का कलेजा मुंह में आ गया हो। लेकिन उनके अधिकारी बिल्कुल संवेदनशील नही हैं। वे इसे खुद को और ज्यादा मालामाल करने के अवसर के रूप में देख रहे हैं। सूखे के कारण सबसे ज्यादा बल्ले-बल्ले नलकूप विभाग की हो रही है जो कफन खसोट रवैया अपनाते हुए अपने मारे मर रहे किसानों को लूटने में कोई कसर नही छोड़ रहा।
गत् वर्ष बारिश के सीजन में रहे अवर्षण के कारण बुंदेलखंड के किसान खासतौर से बेहद मुश्किल में हैं। वे खरीफ के बाद रबी की फसल से भी हाथ धो बैठने की हालत में नजर आ रहे हैं। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने उनकी स्थिति पर करुणा विगलित होकर आमतौर पर आपदा को नकारने के सरकारों के शुतुरमुर्गीय रवैये से अलग अंदाज दिखाया। जो उनके द्वारा बुंदेलखंड सहित प्रदेश के तमाम जिलों को सूखा प्रभावित घोषित कर किसानों की राहत के लिए युद्ध स्तरीय प्रयास शुरू करने के रूप में दृष्टिगोचर हुआ।
लेकिन बिडंबना यह है कि उन्हीं के अधिकारी उनकी इस कोशिश पर पानी फेरने में जुटे हुए हैं। राजकीय नलकूप की मोटर खराब हो तो यह लोग किसान को अपनी जेब से खर्च करके मोटर स्टोर तक लाने और रिपेयरिंग के बाद उसे खुद ही वापस ले जाने के लिए मजबूर करते हैं और इसका बिल बनाकर विभाग से जो रकम निकलती है उसे खुद हड़प जाते हैं। यही नही मोटर ठीक करने या अन्य रिपेयरिंग के लिए किसानों को ब्लैकमेल करने से बाज नही आते। वे तब तक रिपेयरिंग नही करते जब तक कि किसान घिघियाते हुए उन्हें चढ़ौती न चढ़ा दें। ऐसे में जबकि किसानों को बीज तक कर्जा लेकर खरीदना पड़ा है। नलकूप विभाग की राक्षसी हविश पूरी करने के लिए उन्हें और ज्यादा कर्जें की जरूरत पड़ रही है। जिससे अगर फसल सलामत रह भी गई तब भी खेती घाटे का सौदा साबित हुई तो आश्चर्य न होगा।

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