उरई। शिक्षा के अधिकार से वंचित करके ही देश के बहुसंख्यक समाज को दासता की बेडिय़ों में सदियों तक जकड़ कर रखना संभव हो पाया। बाबा साहब के समता, स्वतंत्रता और बंधुत्व पर आधारित संविधान में इसी कारण सभी के लिये शिक्षा के द्वार खोले गये जिससे भारत सभ्य देश की श्रेणी में शामिल हो सका है। वंचित समाज को बाबा साहब के शिक्षित बनो, संगठित हो और संघर्ष करो के मंत्र को हमेशा स्मरण रखना होगा।
यह बात रामनगर स्थित दलित छात्रावास में डा.अम्बेडकर स्टूडेंट फ्रंट आफ इंडिया के तत्वावधान में राष्ट्रमाता सावित्री बाई फुले जयन्ती के अवसर पर आयोजित गोष्ठी में कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डास्फी के प्रदेश संयोजक मनीष आनंद ने कहीं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रमाता सावित्री बाई फुले ने आजादी के पहले शोषित समाज और स्त्रियों को शिक्षा का अधिकार दिलाने की पहल की। जिसके कारण उन्हें तमाम संघर्ष का सामना करना पड़ा। आज वंचित समाज का जो उत्थान हो रहा है वह सावित्रीबाई फुले जैसे हमारे महापुरुषों के योगदान का ही फल है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए चौ.बादाम सिंह ने कहा कि भेदभाव पर आधारित सामाजिक व्यवस्था के कारण शोषित समाज की प्रतिभा और लगन का फायदा उठाने से यह देश सदियों तक वंचित रहा। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने अमानवीय समाज व्यवस्था बनायी उनकी शिनाख्त देशद्रोहियों के रूप में होनी चाहिये।
कार्यक्रम में चन्द्रशेखर, सोनू, निपेन्द्र, आकाशबाबू, अभि गौतम, आमोद कुमार, सत्येन्द्र, रविकांत, मानसिंह, देवेन्द्र, राजकुमार आदि ने भी विचार प्रकट किये।






Leave a comment